Go To Mantra
Viewed 601 times

ब॒तो ब॑तासि यम॒ नैव ते॒ मनो॒ हृद॑यं चाविदाम । अ॒न्या किल॒ त्वां क॒क्ष्ये॑व यु॒क्तं परि॑ ष्वजाते॒ लिबु॑जेव वृ॒क्षम् ॥

English Transliteration

bato batāsi yama naiva te mano hṛdayaṁ cāvidāma | anyā kila tvāṁ kakṣyeva yuktam pari ṣvajāte libujeva vṛkṣam ||

Mantra Audio
Pad Path

ब॒तः । ब॒त॒ । अ॒सि॒ । य॒म॒ । न । ए॒व । ते॒ । मनः॑ । हृद॑यम् । च॒ । अ॒वि॒दा॒म॒ । अ॒न्या । किल॑ । त्वाम् । क॒क्ष्या॑ऽइव । यु॒क्तम् । परि॑ । स्व॒जा॒ते॒ । लिबु॑जाऽइव । वृ॒क्षम् ॥ १०.१०.१३

Rigveda » Mandal:10» Sukta:10» Mantra:13 | Ashtak:7» Adhyay:6» Varga:8» Mantra:3 | Mandal:10» Anuvak:1» Mantra:13


BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यम) हे दिवस ! (बत) हा ! दुःख है कि तू (बतः) विवश (असि) है, क्योंकि दैवकृत बाधा को सहसा कोई भी नहीं हटा सकता, इसलिए (ते) तेरे (मनः) मन (च) और (हदयम्) वक्षःस्थल को मैंने (न-एव) नहीं (अविदाम) प्राप्त किया (अन्या किल) मुझ से भिन्न कोई भी स्त्री (कक्ष्या-इव-युक्तम्) कक्ष-काँख में बंधी पेटी के समान सम्यक्प्रकार से (त्वाम्) तुझ को (परिष्वजाते) आलिङ्गन करे अथवा (लिबुजा इव वृक्षम्) जैसे लता वृक्ष को लिपटती है, वैसे तुझ से भी लिपटे ॥१३॥
Connotation: - यदि स्त्री में कोई दोष है, जिसके कारण वह सन्तानोत्पत्ति में असमर्थ है, तो उसे भी चाहिए कि वह पति को दूसरी स्त्री से सन्तानोत्पत्ति के लिये अनुमति दे देवे ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

कक्ष्या और युक्त या बेल और वृक्ष

Word-Meaning: - [१] सम्पूर्ण कई परीक्षा में उत्तीर्ण होते हुए अपने भाई को देखकर हृदय में प्रसन्न होती हुई यमी कहती है कि (बत उ बत असि) = [ Joy or satisfaction तथा wonder or surprise] अरे भाई ! तू तो मेरे हृदय को आनन्दित व आश्चर्यित करनेवाला है। [२] मैंने अभी तक (ते मनः) = तेरे मानसभावों को (हृदयं च) = व दिल की गहराई [ दृढ़ि आस्तिकभाव] को न एव अविदाम नहीं ही जाना था। आज तेरी महत्ता को समझ बड़ी प्रसन्नता हुई है। [३] यह ठीक ही है कि (अन्या किल) = निश्चय से मेरे से विलक्षण अर्थात् सुदूर गोत्र वाली ही कोई कन्या (त्वां परिष्वजाते) = तेरा आलिंगन करे । उसी प्रकार आलिंगन करे (इव) = जैसे कि (कक्ष्या) = कमर में बाँधी जानेवाली (रज्जु युक्तम्) = अपने से सम्बद्ध घोड़े को आलिंगित करती है अथवा (इव) = जैसे (लिबुजा) = बेल (वृक्षम्) = वृक्ष को आलिंगित करती है। तेरा अपनी पत्नी से सम्बन्ध तुझे शक्तिशाली बनानेवाला हो उसी प्रकार जैसे कक्ष्या घोड़े को कसी हुई कमर वाला बनाती है । और तू पत्नी का उसी प्रकार सहारा हो तथा उसकी उन्नति का कारण बन जैसे कि वृक्ष बेल का ।
Connotation: - भावार्थ- सुदूर सम्बन्ध के होने पर पत्नी पति की शक्ति व उत्साह के वर्धन का कारण बने और पति पत्नी का आश्रय व वर्धक हों।

BRAHMAMUNI

Word-Meaning: - (यम) हे दिवस ! (बत) हा ! दुःखं किं कुर्यां यत्त्वं (बतः-असि) बलादतीतो विवशोऽसि “बतः-बलादतीतः” [निरु० ६।२८] कुतः ? दैवकृतबाधकं न कश्चिदपि द्रागपाकर्तुं शक्नोति, तस्मात् (ते) तव (मनः-हृदयं च) मनो हृदयञ्च (न-एव अविदाम) नालभे ‘विद्लृ लाभे तुदादिरुभयतोभाषः’, “अस्मदो द्वयोश्च” [अष्टा० १।२।५९] इत्यनेनैकस्मिन् बहुवचनं (अन्या) मद्भिन्ना काचित् स्त्री (किल) हि (कक्ष्या-इव) कक्षगता बन्धनरज्जुरिव (युक्तम्) सम्यक् प्रकारेण (त्वां परि स्वजाते) त्वां परिष्वजेत-आलिङ्गेत् “लिङर्थे लेट्” सूत्रेण लेट्, अथ च (लिबुजा-इव वृक्षम्) लता वृक्षं यथा परिष्वजेत ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Yami: Sorry Yama, O day, it is a pity I did not know your mind and heart this way of nature. May be some one other than me too may join you like a girdle round your waist and embrace you like a creeper clinging by a tree.