Go To Mantra

प्र यत्ते॑ अग्ने सू॒रयो॒ जाये॑महि॒ प्र ते॑ व॒यम्। अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम् ॥

English Transliteration

pra yat te agne sūrayo jāyemahi pra te vayam | apa naḥ śośucad agham ||

Mantra Audio
Pad Path

प्र। यत्। ते॒। अ॒ग्ने॒। सू॒रयः॑। जाये॑महि। प्र। ते॒। व॒यम्। अप॑। नः॒। शोशु॑चत्। अ॒घम् ॥ १.९७.४

Rigveda » Mandal:1» Sukta:97» Mantra:4 | Ashtak:1» Adhyay:7» Varga:5» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:15» Mantra:4


Reads 420 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसके कैसे के कैसे हों, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

Word-Meaning: - हे (अग्ने) आप उत्तर-प्रत्युत्तर से कहनेवाले ! (यत्) जिन (ते) आपके जैसे (सूरयः) पूरी विद्या पढ़े हुए विद्वान् सभासद् हैं, उन (ते) आपके वैसे ही (वयम्) हमलोग भी (प्र, जायेमहि) प्रजाजन हों और ऐसे तुम (नः) हम लोगों के (अघम्) विरोधरूप पाप को (प्र, अप, शोशुचत्) अच्छे प्रकार दूर कीजिये ॥ ४ ॥
Connotation: - इस संसार में जैसे धर्मिष्ठ सभा आदि के अधीश मनुष्य हों, वैसे ही प्रजाजनों को भी होना चाहिये ॥ ४ ॥
Reads 420 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ज्ञान व पाप - शोषण

Word-Meaning: - १. हे (अग्ने) = परमात्मन् । (यत्) = यदि (सूरयः) = ज्ञानी बनकर (वयम्) = हम (ते) = आपके और (ते) = आपके ही (प्र प्रजायेमहि) = प्रकर्षेण पूर्णरूपेण हो जाएँ तो (नः) = हमारा (अघम्) = पाप (अप) = हमसे दूर होकर (शोशुचत्) = शोक - सन्तप्त होकर नष्ट हो जाए ।  २. जितना - जितना हम प्रकृति की ओर झुकते हैं , उतनी - उतनी ही पापों में फंसने की आकांक्षा बढ़ती जाती है और जितना - जितना प्रभु की ओर झुकते हैं , उतना - उतना पाप से परे होते जाते हैं । प्रकृति की ओर न झुककर प्रभु की ओर झुकने के लिए ज्ञान आवश्यक है । उस ज्ञान के लिए तप , स्वाध्याय व ईश्वरप्रणिधान रूप क्रियायोग साधन है । यह क्रियायोग हमें (‘सूरि’) = ज्ञानी बनाएगा और ‘सूरि’ बनकर हम प्रभु के बनेंगे , प्रभु के बनकर पापों से बच जाएंगे ।   
Connotation: - भावार्थ - प्रभु का ज्ञानीभक्त ही पापों का समूल शोषण कर पाता है ।   
Reads 420 times

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तस्य कीदृशस्य कीदृशाश्चेत्युपदिश्यते ।

Anvay:

हे अग्ने यद्यस्य ते तव यादृशाः सूरयः सभासदः सन्ति तस्य ते तव तादृशा वयमपि प्रजायेमहीदृशस्त्वं नोऽस्माकमघं प्रापशोशुचत् ॥ ४ ॥

Word-Meaning: - (प्र) (यत्) यस्य (ते) तव (अग्ने) आप्तानूचानाध्यापक (सूरयः) पूर्णविद्यावन्तो विद्वांसः (जायेमहि) (प्र) (ते) तव (वयम्) (अप, नः०) इति पूर्ववत् ॥ ४ ॥
Connotation: - इह संसारे यादृशा धर्मिष्ठाः सभाद्यध्यक्षा मनुष्या भवेयुस्तादृशैरेव प्रजास्थैर्मनुष्यैर्भवितव्यम् ॥ ४ ॥
Reads 420 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Lord of light and power, Agni, as your leading and brilliant brave heroes and devotees are, so may we rise to be. Lord, we pray, save us from our sins and let us shine.
Reads 420 times

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

How are the members is taught in the fourth Mantra.

Anvay:

O Agni (Absolutely truthful, learned teacher of the Vedas) let us become like the highly educated members of your assembly. Remove or burn all our sin of mind, speech and body.

Word-Meaning: - (अग्ने) आप्तानूचानाध्यापक (सूरयः) = Perfectly learned persons.
Connotation: - The public or ordinary persons should also try to follow the noblest or most righteous Presidents of the Assemblies etc. in this world.
Reads 420 times

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या जगात जसा धार्मिक सभाध्यक्ष असेल तसेच प्रजेनेही बनावे. ॥ ४ ॥