Go To Mantra
Viewed 421 times

अग्नी॑षोमा॒ यो अ॒द्य वा॑मि॒दं वच॑: सप॒र्यति॑। तस्मै॑ धत्तं सु॒वीर्यं॒ गवां॒ पोषं॒ स्वश्व्य॑म् ॥

English Transliteration

agnīṣomā yo adya vām idaṁ vacaḥ saparyati | tasmai dhattaṁ suvīryaṁ gavām poṣaṁ svaśvyam ||

Mantra Audio
Pad Path

अग्नी॑षोमा। यः। अ॒द्य। वा॒म्। इ॒दम्। वचः॑। स॒प॒र्यति॑। तस्मै॑। ध॒त्त॒म्। सु॒ऽवीर्य॑म्। गवा॑म्। पोष॑म्। सु॒ऽअश्व्य॑म् ॥ १.९३.२

Rigveda » Mandal:1» Sukta:93» Mantra:2 | Ashtak:1» Adhyay:6» Varga:28» Mantra:2 | Mandal:1» Anuvak:14» Mantra:2


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वे कैसे हैं, यह विषय अगले मन्त्र में कहा है ।

Word-Meaning: - हे (अग्नीषोमा) पढ़ाने और परीक्षा लेनेवाले विद्वानो ! (यः) जो पढ़नेवाला (अद्य) आज (वाम्) तुम्हारे (इदम्) इस (वचः) विद्या के वचन को (सपर्यति) सेवे (तस्मै) उसके लिये (स्वश्व्यम्) जो अच्छे-अच्छे घोड़ों से युक्त (सुवीर्य्यम्) उत्तम-उत्तम बल जिस विद्याभ्यास से हों, उस (गवाम्) इन्द्रिय और गाय आदि पशुओं के (पोषम्) सर्वथा शरीर और आत्मा की पुष्टि करनेहारे सुख को (धत्तम्) दीजिये ॥ २ ॥
Connotation: - जो ब्रह्मचारी विद्या के लिये पढ़ाने और परीक्षा करनेवालों के प्रति उत्तम प्रीति को करके और उनकी नित्य सेवा करता है, वही बड़ा विद्वान् होकर सब सुखों को पाता है ॥ २ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सुवीर्य, सुज्ञान, सुकर्म

Word-Meaning: - १. हे (अग्नीषोमा) = प्राण व अपानो ! (यः) = जो (अद्य) = आज (वाम्) = आपका (इदं वचः) = इस स्तुतिवचन के द्वारा (सपर्यति) = पूजन करता है, (तस्मै) = उसके लिए आप (सुवीर्यम्) = उत्तम शक्ति को (धत्तम्) = धारण करते हैं, (गवां पोषम्) = ज्ञानेन्द्रियों का पोषण प्राप्त कराते हैं [गावः = ज्ञानेन्द्रियाणि गमयन्त्यर्थान्], उसके लिए आप (स्वश्वान्) = उत्तम कर्मेन्द्रियों को प्राप्त कराते हैं [अश्नुवते कर्मसु इति अश्वाः] । २. प्राणसाधना के द्वारा शक्ति की ऊर्ध्वगति होकर मनुष्य उत्तम वीर्यवाला बनता है । यह वीर्य ज्ञानशक्ति का ईंधन बनता है, ज्ञानेन्द्रियों को पुष्ट करता है । साथ ही यह सुरक्षित शक्ति कर्मेन्द्रियों को शक्तिशाली बनाती है ।
Connotation: - भावार्थ = शरीर में अग्नि व सोम का समन्वय होने पर शक्ति की वृद्धि होती है, ज्ञानेन्द्रियाँ पुष्ट होती हैं और कर्मेन्द्रियाँ सदा उत्तम कर्मों में व्यापृत होती हैं ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तौ कीदृशावित्युपदिश्यते ।

Anvay:

हे अग्नीषोमावध्यापकसुपरीक्षकौ योऽद्य वामिदं वचः सपर्यति तस्मै स्वश्व्यं सुवीर्य्यं गवां पोषं च धत्तम् ॥ २ ॥

Word-Meaning: - (अग्नीषोमा) अध्यापकसुपरीक्षकौ। अत्र सुपां सुलुगित्याकारादेशः। (यः) अध्येता (अद्य) (वाम्) युवयोः (इदम्) (वचः) वचनम् (सपर्य्यति) (तस्मै) (धत्तम्) प्रयच्छतम् (सूवीर्यम्) शोभनानि वीर्य्याणि यस्माद्विद्याभ्यासात्तम् (गवाम्) इन्द्रियाणां पशूनां वा (पोषम्) शरीरात्मपुष्टिकारकम् (स्वश्व्यम्) शोभनेष्वश्वेषु साधुम् ॥ २ ॥
Connotation: - यो ब्रह्मचारी विद्यार्थमध्यापकपरीक्षकौ प्रति सुप्रीतिं कृत्वैनौ नित्यं सेवते स एव महाविद्वान् भूत्वा सर्वाणि सुखानि लभते ॥ २ ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni-Soma, whoever may listen to this word of yours, and faithfully follow it in spirit and action, bless him with health and nourishment, speed and success in advancement, sensitivity of mind and brain and generous productivity and social dynamism.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

How are they (Agni and Soma) is taught further in the second Mantra.

Anvay:

O Agni and Soma (good teacher and examiner) grant to him who addresses this request or prayer to you, good knowledge that makes him virile, the strength of senses, body and soul and store of cattle and horses.

Word-Meaning: - (सुवीर्यम्) शोभनानि वीर्याणि यस्माद् विद्याभ्यासात् तम् ॥ = Knowledge that makes a man virile. (गवाम्) इन्द्रियारणां पशूनां वा
Connotation: - The Brahmachari who ever serves well his teachers and examiners with love becomes a good scholar and enjoys all happiness.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जो ब्रह्मचारी विद्येसाठी अध्यापक व परीक्षक यांचे उत्तम प्रेम संपादन करून त्यांची सदैव सेवा करतो तोच मोठा विद्वान बनून सर्व सुख प्राप्त करतो. ॥ २ ॥