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तेन॑ नास॒त्या ग॑तं॒ रथे॑न॒ सूर्य॑त्वचा । येन॒ शश्व॑दू॒हथु॑र्दा॒शुषे॒ वसु॒ मध्वः॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥

English Transliteration

tena nāsatyā gataṁ rathena sūryatvacā | yena śaśvad ūhathur dāśuṣe vasu madhvaḥ somasya pītaye ||

Mantra Audio
Pad Path

तेन॑ । ना॒स॒त्या॒ । आ । ग॒त॒म् । रथे॑न । सूर्य॑त्वचा । येन॑ । शश्व॑त् । ऊ॒हथुः॑ । दा॒शुषे॑ । वसु॑ । मध्वः॑ । सोम॑स्य । पी॒तये॑॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:47» Mantra:9 | Ashtak:1» Adhyay:4» Varga:2» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:9» Mantra:9


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वे क्या करें, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - हे (नासत्या) सत्याचरण करने हारे सभासेना के स्वामी ! आप (येन) जिस (सूर्य्यत्वचा) सूर्य्य की किरणों के समान भास्वर (रथेन) गमन करानेवाले विमानादि यान से (आगतम्) अच्छे प्रकार आगमन करें (तेन) उससे (दाशुषे) दानशील मनुष्य के लिये (मध्वः) मधुरगुणयुक्त (सोमस्य) पदार्थसमूह के (पीतये) पान वा भोग के अर्थ (वसु) कार्य्यरूपी द्रव्य को (ऊहथुः) प्राप्त कराइये ॥९॥
Connotation: - राजपुरुष जैसे अपने हित के लिये प्रयत्न करते हैं उसी प्रकार प्रजा के सुख के लिये भी प्रयत्न करें ॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सूर्यत्वाच् रथ

Word-Meaning: - १. हे (नासत्या) = जिनके कारण असत्य नहीं रहता, ऐसे प्राणापानो ! (तेन) = उस (सूर्यत्वचा) = [सूर्यरश्मिसदृशेन] सूर्यरश्मियों के समान चमकनेवाले (रथेन) = शरीररूपी रथ से (आगतम्) = हमें प्राप्त होओ, (येन) = जिससे (दाशुषे) = दाश्वान् पुरुष के लिए (वसु) = निवास के लिए आवश्यक धनों को (शश्वत्) = सदा (ऊहथुः) = प्राप्त कराते हो । प्राणसाधना से यह शरीररूपी रथ सूर्य की भाँति चमकनेवाला बनता है, शरीर में निवास के लिए सब आवश्यक वसुओं - तत्वों की प्राप्ति से शारीरिक स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक बना रहता है । २. हे प्राणापानो ! आप (मध्वः सोमस्य) = शहद की भाँति सब भोजनों के सारभूत सोम के (पीतये) = पान व रक्षण के लिए होओ । प्राणसाधना से शरीर में सोम की ऊर्ध्वगति होती है और यह सुरक्षित सोम हमारे जीवन को अत्यन्त मधुर बनाता है ।
Connotation: - भावार्थ - प्राणसाधना शरीर को पूर्ण स्वस्थ बनाकर सूर्य के समान दीप्त बनाती है ।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(तेन) पूर्वोक्तेन वक्ष्यमाणेन च (नासत्या) सत्याचरणस्वरूपौ (आ) समन्तात् (गतम्) गच्छतम् (रथेन) विमानादिना (सूर्य्यत्वचा) सूर्य्यइव त्वग् यस्य तेन (येन) उक्तेन (शश्वत्) निरन्तरम् (ऊहथुः) प्रापयतम् (दाशुषे) दानशीलाय मनुष्याय (वसु) कार्य्यकारणद्रव्यं वा (मध्वः) मधुरगुणयुक्तस्य (सोमस्य) पदार्थसमूहस्य (पीतये) पानाय भोगाय वा ॥९॥

Anvay:

पुनस्तौ किं कुर्य्यातामित्युपदिश्यते।

Word-Meaning: - हे नासत्या ! युवां येन सूर्य्यत्वचा रथेनागतं तेन दाशुषे मध्वः सोमस्य पीतये शश्वद्वसूहथुः प्रापयतम् ॥९॥
Connotation: - राजपुरुषा यथा स्वहिताय प्रयतन्ते तथैव प्रजासुखायापि प्रयतेरन् ॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ashvins, ever true and dedicated to the light of truth, come by that very chariot of sunbeams by which you always bear and bring the wealth of life for the man of charity, for the taste and protection of the honeyed soma of yajnic glory.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject is continued.

Anvay:

O embodiments of truth, come on your vehicle like the aero plane etc. shining like the sun and bring wealth (of-all kinds) to the liberal donor for drinking sweet Soma (herbal juice) and enjoying prosperity.

Word-Meaning: - ( रथेन) विमानादिना = With the vehicle like the aero plane etc. (सोमस्य) पदार्थसमूहस्य = Of various article ( पीतये ) पानाय भोगाय वा = For drinking or enjoyment.
Footnote: As the word सोम (Soma ) is derived from षु-प्रसवैश्वर्ययोः taking the second meaning of wealth or of the articles produced, it may mean पदार्थसमूह: besides Soma Juice with which पीतये पानाय has been used in the Mantra and in the Rishi's commentary. ( षूयन्ते-उत्पद्यन्ते ये ते पदार्था: ऋ० १.२३.१ भाष्ये )

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - राजपुरुष जसे आपल्या हितासाठी प्रयत्न करतात त्याचप्रकारे प्रजेच्या सुखासाठीही प्रयत्न करावेत. ॥ ९ ॥