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ह॒विषा॑ जा॒रो अ॒पां पिप॑र्ति॒ पपु॑रिर्नरा । पि॒ता कुट॑स्य चर्ष॒णिः ॥

English Transliteration

haviṣā jāro apām piparti papurir narā | pitā kuṭasya carṣaṇiḥ ||

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Pad Path

ह॒विषा॑ । जा॒रः । अ॒पाम् । पिप॑र्ति । पपु॑रिः । न॒रा॒ । पि॒ता । कुट॑स्य । च॒र्ष॒णिः॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:46» Mantra:4 | Ashtak:1» Adhyay:3» Varga:33» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:9» Mantra:4


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - हे (नरा) नीति के सिखाने पढ़ाने और उपदेश करने हारे लोगो ! तुम जैसे (जारः) विभाग कर्त्ता (पपुरिः) अच्छे प्रकार पूर्त्ति (पिता) पालन करने (कुटस्य) कुटिल मार्ग को (चर्षणिः) दिखलाने हारा सूर्य (हविषा) आहुति से बढ़कर (अपाम्) जलों के योग से (पिपर्त्ति) पूरण कर प्रजाओं का पालन करता है वैसे प्रजा का पालन करो ॥४॥
Connotation: - मनुष्यों को योग्य है कि जैसे सविता वर्षा के द्वारा जिलाने के योग्य प्राणी और अप्राणियों को पुष्ट करता है वैसे ही सबको पुष्ट करें ॥४॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सूर्य का रक्षण व मार्गदर्शन

Word-Meaning: - १. हे (नरा) - उन्नति - पथ पर ले - चलनेवाले प्राणापानो ! जब हम आपकी साधना करते हैं तब यह (अपां जारः) - जलों को, वाष्पीभूत करके उड़ाने के द्वारा, जीर्ण करता हुआ सूर्य (हविषा) - अग्नि में आहुतियों के द्वारा (पिपर्ति) - प्रजा का पालन करता है । प्राणसाधना से हम विलास की वृत्ति से ऊपर उठकर यज्ञिय वृत्तिवाले बनते हैं । इन यज्ञों के करने पर ये (हविः) - पदार्थ छोटे - छोटे कणों में विभक्त होकर सूर्य तक पहुँचता है [अग्नी प्रस्ताहुतिः सम्यगादित्यमुपतिष्ठते - मनु०] । वहाँ ये सूक्ष्म कण वृष्टि - बिन्दुओं को केन्द्र बनकर बरसने पर पौष्टिक अन्न के उत्पादन का हेतु होते हैं । एवं यह सूर्य हवि के द्वारा हमारा पालन करता है । इसी से यह (पपुरिः) - पालन व पूरण करनेवाला कहलाता है ।  २. यह सूर्य (पिता) - सबका रक्षक है और (कुटस्य) - मार्ग की कुटिलता का (चर्षणिः) - दिखानेवाला है और इस प्रकार उसमें संलिप्त होने से हमें बचानेवाला है, परन्तु यह सब होता तभी है जबकि हम प्राणों की साधना करते हैं; उसके अभाव में हम सूर्यप्रकाश में भी कुटिल मार्ग से ही चलते रहते हैं ।   
Connotation: - भावार्थ - प्राणसाधक के लिए सूर्य रक्षा करनेवाला होता है तथा उसे गन्तव्य मार्ग से भटकने नहीं देता ।   

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(हविषा) दानाऽऽदानेन (जारः) विभागकर्त्तादित्यः (अपाम्) जलानाम् (पिपर्त्ति) प्रपिपूर्त्ति (पपुरिः) प्रपूरको विद्वान् (नरा) नेतारावध्यापकोपदेशकौ। अत्र सुपांसुलुग् इत्याकारादेशः। (पिता) पालयिता (कुटस्य) कुटिलस्य मार्गस्य सकाशात् (चर्षणिः) दर्शको मनुष्यः। चर्षणिरिति पदना०। निघं० ४।२। इमं मन्त्रं यास्कमुनिरेवं समाचष्टे। हविषाऽपां जारयिता पिपर्त्ति पपुरिरिति पृणाति निगमौ वा प्रीणाति निगमौ वा पिता कृतस्य कर्मणश्च पितादित्यः। निरु०। ५।२४। ॥४॥

Anvay:

पुनः स कीदृशइत्युपदिश्यते।

Word-Meaning: - हे नरा ! युवां यथा जारः पपुरिश्च कुटस्य पिता चर्षणिरादित्यो हविषाधिविष्टप्यपां योगेन पिपर्त्ति तथा प्रजाः पालयताम् ॥४॥
Connotation: - मनुष्यो यथा सूर्यो वर्षादिद्वारा प्राण्यप्राणिनः पुष्णाति तथा सर्वान् पुष्येत् ॥४॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Ye men and women of the world, the sun, lover of the dawn, father, protector and illuminator of the tortuous paths and human habitations nourishes and promotes life with the consumption and creation of waters across the heavens over the earth.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Anvay:

O leading teachers and preachers, you should preserve and protect the people as the sun who is dissolver of all darkness and thus protector from crooked paths, displayer of right path with his light and who protects all by the combination of waters in the firmament and giving light.

Word-Meaning: - (जार:) विभागकर्ता आदित्य: = Dissolver of darkness. (नरा) नेतारौ अध्यापकोपदेशकौ = Leading men, teachers and preachers. ( कुटस्य) कुटिलस्य मार्गस्य सकाशात् = From the crooked path. ( कुट-कौटिल्ये ) ( चर्षणिः) दर्शक: = Shower. विश्वचर्षणिः-पश्यतिकर्मा ( निघ० ३.११) चर्षणिरितिपदनाम ( निघ० ४.२) पद-गतौ गतेस्त्रयोऽर्था: ज्ञानं गमनं प्राप्तिव, ज्ञान प्रापक:
Connotation: - A man should nourish and support all beings and things as the sun does by giving light and raining down waters etc.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जसा सूर्य जीवित प्राण्यांना व अप्राण्यांना पुष्ट करतो तसेच माणसांनी सर्वांना पुष्ट करावे. ॥ ४ ॥