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अभू॑दु पा॒रमेत॑वे॒ पन्था॑ ऋ॒तस्य॑ साधु॒या । अद॑र्शि॒ वि स्रु॒तिर्दि॒वः ॥

English Transliteration

abhūd u pāram etave panthā ṛtasya sādhuyā | adarśi vi srutir divaḥ ||

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Pad Path

अभू॑त् । ऊँ॒ इति॑ । पा॒रम् । एत॑वे । पन्था॑ । ऋ॒तस्य॑ । सा॒धु॒या । अद॑र्शि । वि । स्रु॒तिः । दि॒वः॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:46» Mantra:11 | Ashtak:1» Adhyay:3» Varga:35» Mantra:1 | Mandal:1» Anuvak:9» Mantra:11


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी उत्तर का उपदेश अगले मन्त्र में करते हैं०।

Word-Meaning: - मनुष्यों को योग्य है कि समुद्रादि के (पारम्) पार (एतवे) जाने के लिये जहां (दिवः) प्रकाशमान सूर्य्य और (ऋतस्य) जल का (विस्रुतिः) अनेक प्रकार गमनार्थ (पन्थाः) मार्ग (अभूत्) हो वहां स्थिर होके (साधुया) उत्तम सवारी से सुखपूर्वक देश देशान्तरों को (अदर्शि) देखें तो श्रीमन्त क्यों न होवें ॥११॥
Connotation: - मनुष्यों को उचित हैं कि सर्वत्र आने जाने के लिये सीधे और शुद्ध मार्गों को रच और विमानादि यानों से इच्छापूर्वक गमन करके नाना प्रकार के सुखों को प्राप्त करें ॥११॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ऋत का मार्ग

Word-Meaning: - १. गतमन्त्र के अनुसार 'बाँटकर खाना' निष्कामभाव से कर्तव्यकर्म में लगे रहना तथा जिह्वा आदि के विषयों में न फंसना' - यह मार्ग ही 'ऋत का मार्ग है । (ऋतस्य पन्थाः) - ऋत का यह मार्ग (साधुया) - समीचीनता से (पारम् एतवे) - संसार - सागर से पार जाने के लिए (अभूत् उ) - निश्चय से होता है । इस मार्ग पर चलते हुए मनुष्य संसार - सागर से पार हो जाता है ।  २. इस मार्ग पर चलने से (दिवः) - प्रकाश की (विस्रुतिः) - [प्रसृता दीप्तिः - सा०] विस्तृत दीप्ति (वि अदर्शि) - दिखती है, अर्थात् ऋत के मार्ग पर चलने से ज्ञान की ज्योति भी बढ़ती है ।   
Connotation: - भावार्थ - हम ऋत के मार्ग पर चलें । यह मार्ग हमें जन्म - मरण के चक्र से बचानेवाला होगा और हमारी ज्ञान की दीप्ति को बढ़ाएगा ।   

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(अभूत्) भवेत्। अत्र लङर्थे लुङ्। (उ) निश्चयार्थे (पारम्) परभागम् (एतवे) एतुम्। अत्र तुमर्थे से० इति तवे प्रत्ययः। (पन्थाः) मार्गः (ऋतस्य) जलस्य (साधुया) साधुना। अत्र सुपां सुलुग् इति याडादेशः। (अदर्शि) दृश्यताम्। अत्रापि लङर्थे लुङ्। (वि) विविधार्थे (स्रुतिः) स्रवणं गमनं यस्मिन्मार्गे सः (दिवः) प्रकाशमानादग्नेः ॥११॥

Anvay:

पुनस्तदेवोपदिश्यते।

Word-Meaning: - यदि मनुष्यैः समुद्रादेः पारमेतवे यत्र दिव ऋतस्य विस्रुतिः पन्थाअभूत्तत्र स्थित्वा साधुया यानेन सुखतो देशान्तरमदर्शि तर्हि श्रीमन्तः कथं न स्युः ॥११॥
Connotation: - मनुष्यैः सर्वत्र गमनागमनार्थाय सरलान् शुद्धान् मार्गान् रचयित्वा तत्र विमानादिभिर्यानैर्यथावद्गमनं कृत्वा विविधानि सुखानि प्राप्तव्यानि ॥११॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The path of the laws of science and nature, as the path of Truth, is for simple and sure travel across the seas of existence to the cherished goal. See the flow of light divine from the doors of heaven.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject is continued.

Anvay:

If men make straight paths to go to the other shore of the sea and use in the Vehicles the fire and the water in proper proportion, travelling by such nice vehicles, they can happily and easily go to other countries, why should they not be then prosperous by carrying on their business there?

Word-Meaning: - (ऋतस्य) जलस्य (ऋतमिति उदक नाम निघ. १.१२ ) = Of the water. ( स्त्रुतिः) स्रवणं गमनं यस्मिन् मार्गे सः = Path. (दिव:) प्रकाशमानात् अग्ने: = Form the bright fire.
Connotation: - Men should build straight and easy paths for their journey everywhere and then travelling by aero planes and other chariots, they should enjoy happiness of various kinds.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - माणसांनी सर्वत्र गमनागमन करण्यासाठी सहज व निर्दोष मार्ग निर्माण करून विमान इत्यादी यानांनी इच्छापूर्वक गमन करून नाना प्रकारचे सुख भोगावे. ॥ ११ ॥