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शं नः॑ कर॒त्यर्व॑ते सु॒गं मे॒षाय॑ मे॒ष्ये॑ । नृभ्यो॒ नारि॑भ्यो॒ गवे॑ ॥

English Transliteration

śaṁ naḥ karaty arvate sugam meṣāya meṣye | nṛbhyo nāribhyo gave ||

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Pad Path

शन् । नः॒ । क॒र॒ति॒ । अर्व॑ते । सु॒गम् । मे॒षाय॑ । मे॒ष्ये॑ । नृभ्यः॑ । नारि॑भ्यः । गवे॑॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:43» Mantra:6 | Ashtak:1» Adhyay:3» Varga:27» Mantra:1 | Mandal:1» Anuvak:8» Mantra:6


SWAMI DAYANAND SARSWATI

वह उसके लिये क्या करता है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - जो रुद्रस्वामी (नः) हम लोगों की (अर्वते) अश्वजाती (मेषाय) मेषजाति (मेष्ये) भेड़ बकरी (नृभ्यः) मनुष्य जाति (नारिभ्यः) स्त्री जाती और (गवे) गो जाति के लिये (सुगम्) सुगम् (शम्) सुख को (करति) निरन्तर करै वही न्यायाधीश करना चाहिये ॥६॥
Connotation: - मनुष्यों को अपने वा पराए पशु, मनुष्यों के लिये परमेश्वर की प्रार्थना, विद्वानों की सहायता, प्राणवायुओं से यथावत् उपयोग और अपना पुरुषार्थ करना चाहिये ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अश्व - मेष - नर और गौ

Word-Meaning: - १. गतमन्त्र में कीर्तित 'सूर्य व हिरण्य की भाँति देदीप्यमान, देव श्रेष्ठ, वसु' प्रभु (नः) - हमारे (अर्वते) - घोड़ों के लिए (शं करति) - शान्ति करते हैं, प्रभुकुपा से हमारे राष्ट्र में घोड़े शक्तिशाली होते हैं । राष्ट्र में इधर - उधर वस्तुओं के परिवहन - कार्य में वे उत्तमता से उपयुक्त होते हैं ।  २. वे प्रभु हमारे (मेषाय) - मेड़ों के लिए (मेष्ये) - भेड़ों के लिए (सुगम्) - सुष्ठु गम्य - सुगमता से प्राप्त होनेवाली (शम्) - शान्ति को (करति) - करते हैं । मेढ़े व भेड़ें नीरोग होकर हमारे लिए उत्तम ऊन प्राप्त करानेवाले होते हैं ।  ३. वे प्रभु (नृभ्यः नारिभ्यः) - राष्ट्र के सब नर - नारियों के लिए (सुगं शम्) - सुष्ठु गम्य शान्ति को देनेवाले होते हैं । राष्ट्र में सब नर - नारी शान्तभाव से, परस्पर प्रेमपूर्वक चलते हुए आगे बढ़ते हैं । ४. वे प्रभु (गवे) - हमारी गौओं के लिए भी शान्ति करते हैं । ये अयक्ष्मा, रोगरहित गौएँ हमें सात्विक दुग्ध का पान कराती हुई सात्विक वृत्तिवाला बनाती हैं ।   
Connotation: - भावार्थ - राष्ट्र में घोड़े, भेड़ें, नर - नारी व गौएँ सभी सुख व शान्ति को प्राप्त करें, नीरोग हों ।   

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(शम्) सुखम् (नः) अस्माकम् (करति) कुर्यात्। लेट् प्रयोगोऽयम्। (अर्वते) अश्वजातये। अर्वेत्यश्वना०। निघं० १।१४। (सुगम्) सुखं गम्यं यस्मिन्। अत्र बहुल#म् इति करणे डः। (मेषाय) मेषजातये (मेष्ये) तत्स्त्रियै। अत्र वाच्छंदसि सर्वे विधयो भवंति इत्यडाग*मो न भवति (नृभ्यः) मनुष्येभ्यः (नारिभ्यः) तत्स्त्रीभ्यः (गवे) गोजातये ॥६॥ #[ कृतो बहुलमित्यर्थः। सं०] *[‘आण्नद्याः’। अ० ७।३।११२, इत्यनेन सूत्रेण। सं०]

Anvay:

स तस्मै किं करोतीत्युपदिश्यते।

Word-Meaning: - यो रुद्रो नोऽस्माकमर्वते मेषाय मेष्ये नृभ्यो नारिभ्यो गवे सुगं शं सततं करति स एव सभाधीशः स्थापनीयः ॥६॥
Connotation: - मनुष्यैः स्वस्य स्वकीयपरकीयानां मनुष्याणां पश्वादीनां च सुखाय परमेश्वरस्य प्रार्थना विदुषां सहायः प्राणानां यथावदुपयोगः पुरुषार्थश्च कर्त्तव्य इति ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Rudra, lord of the world, ruler, healer and teacher may, we pray, bring good health, peace and well being to our horses, sheep and goats, men and women, cows and our mind and sense and to the earth and the environment.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

What does he ( Rudra ) do for him is taught in the sixth Mantra.

Anvay:

He who bestows easily obtained happiness upon or brings health to our horses, welfare to ram and ewe, to men, to women and to the cattle should be made the President of the Assembly.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - Men should pray to God for the happiness and health of their own and other men and animals. They should also take the help of learned persons and should make proper use of the Pranas and exertion.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - माणसांनी आपल्या व इतरांच्या पशू आणि माणसांसाठी परमेश्वराची प्रार्थना करावी. विद्वानांचे साह्य घ्यावे. प्राणवायूचा यथायोग्य उपयोग करावा व स्वतः पुरुषार्थ करावा. ॥ ६ ॥