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स रत्नं॒ मर्त्यो॒ वसु॒ विश्वं॑ तो॒कमु॒त त्मना॑ । अच्छा॑ गच्छ॒त्यस्तृ॑तः ॥

English Transliteration

sa ratnam martyo vasu viśvaṁ tokam uta tmanā | acchā gacchaty astṛtaḥ ||

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Pad Path

सः । रत्न॑म् । मर्त्यः॑ । वसु॑ । विश्व॑म् । तो॒कम् । उ॒त । त्मना॑ । अच्छ॑ । ग॒च्छ॒ति॒ । अस्तृ॑तः॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:41» Mantra:6 | Ashtak:1» Adhyay:3» Varga:23» Mantra:1 | Mandal:1» Anuvak:8» Mantra:6


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वह रक्षा को प्राप्त होकर किसको प्राप्त होता है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - जो (अस्तृतः) हिंसा रहित (मर्त्येः) मनुष्य है (सः) वह (त्मना) आत्मा मन वा प्राण से (विश्वम्) सब (रत्नम्) मनुष्यों के मनों के रमण करानेवाले (वसु) उत्तम से उत्तम द्रव्य (उत) और (तोकम्) सब उत्तम गुणों से युक्त पुत्रों को (अच्छ गच्छति) अच्छे प्रकार प्राप्त होता है ॥६॥
Connotation: - विद्वान् मनुष्यों से अच्छे प्रकार रक्षा किये हुए मनुष्य आदि प्राणी सब उत्तम से उत्तम पदार्थ और सन्तानों को प्राप्त होते हैं रक्षा के विना किसी पुरुष वा प्राणी की बढ़ती नहीं होती ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

आत्मसदृश सन्तान

Word-Meaning: - १. 'वरुण, मित्र व अर्यमा' का आराधक पुरुष, अर्थात् निर्द्वेषता, स्नेह व दान का पुजारी (सः) - वह (मर्त्यः) - मनुष्य (रत्नम्) - रमणीय वस्तुओं को तथा (विश्वं वसु) - निवास के लिए आवश्यक सब उपयोगी धनों को (अच्छा गच्छति) - आभिमुख्येन प्राप्त होता है ।  २.अथवा 'सः' शब्द पिछले मन्त्र के यज्ञशील पुरुष को कहता है । एवं, यज्ञशील रत्नों एवं निवास के लिए आवश्यक सब धनों को प्राप्त करता है ।  ३. (उत) - और (त्मना) - आत्मसदृश (तोकम्) - सन्तान को प्राप्त करता है, अर्थात् जैसे हम होते हैं, वैसी ही सन्तान को हम पाते हैं, अतः इस यज्ञशील पुरुष की सन्तान भी यज्ञ की वृत्तिवाली होती है ।  ४. इस प्रकार यह यज्ञशील पुरुष (अस्तृतः) - अहिंसित होता है । धनों का अभाव इसकी असामयिक मृत्यु का कारण नहीं होता और उत्तम प्रजा का होना उसके वंशतन्तु को समाप्त नहीं होने देता तथा यह प्रजाओं के रूप में अहिंसित ही रहता है ।   
Connotation: - भावार्थ - यज्ञशीलता से रत्न, वसु व आत्मसदृश सन्तान मिलती है । यह यज्ञशील अहिंसित होता है ।   

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(सः) वक्ष्यमाणः (रत्नम्) रमन्ते जनानां मनांसि यस्मिंस्तत् (मर्त्यः) मनुष्यः (वसु) उत्तमं द्रव्यम् (विश्वम्) सर्वम् (तोकम्) उत्तमगुणवदपत्यम्। तोकमित्यपत्यना०। निघं० २।२। (उत) अपि (त्मना) आत्मना मनसा प्राणेन वा। अत्र मंत्रेष्वाङ्यादेरात्मनः। अ० ६।४।१४१। अनेनास्याकारलोपः। (अच्छ) सम्यक् प्रकारेण। अत्र निपातस्य च इति दीर्घः। (गच्छति) प्राप्नोति (अस्तृतः) अहिंसितस्सन् ॥६॥

Anvay:

पुनः स संरक्षितः सन् मनुष्यः किं प्राप्नोतीत्युपदिश्यते।

Word-Meaning: - योऽस्तृतोऽहिंसितो मर्त्यो मनुष्योऽस्ति स त्मनाऽऽत्मना विश्वम् रत्नम् सूतापि तोकमच्छ गच्छति ॥६॥
Connotation: - विद्वद्भिर्मनुष्यैः सम्यग्रक्षिता मनुष्यादयः प्राणिनः सर्वानुत्तमान् पदार्थान् सन्तानांश्च प्राप्नुवन्ति नैतेन विना कस्यचिद्वृद्धिर्भवतीति ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The man of invincible love and non-violence by his very mind and soul gets the wealth and jewels of the world and very dear lovely children.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Anvay:

That mortal, protected by you and not harmed, gains pleasing wealth. He also gets noble off-spring by his power.

Word-Meaning: - ( रत्नम् ) रमन्ते जनानां मनांसि यस्मिन् ( रम्-क्रीडायाम् ) = Pleasing or charming, attractive. (अस्तृत) अहंसित: = Not harmed but protected. ( तोकम् ) उत्तमगुणवत् अपत्यम् तोकमित्यपत्यनाम ( निघ० २.२ ) = Virtuous progeny.
Connotation: - Men protected by learned persons acquire all desirable objects and noble progeny. Without this, none can make true progress.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - विद्वानांकडून चांगल्या प्रकारे रक्षित झालेल्या माणसांना उत्तमात उत्तम पदार्थ व संतान प्राप्त होतात व रक्षणाशिवाय त्यांचा विकास होत नाही. ॥ ६ ॥