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स॒त्यं त्वे॒षा अम॑वन्तो॒ धन्व॑ञ्चि॒दा रु॒द्रिया॑सः । मिहं॑ कृण्वन्त्यवा॒ताम् ॥

English Transliteration

satyaṁ tveṣā amavanto dhanvañ cid ā rudriyāsaḥ | mihaṁ kṛṇvanty avātām ||

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Pad Path

स॒त्यम् । त्वे॒षाः । अम॑वन्तः । धन्व॑म् । चि॒त् । आ । रु॒द्रिया॑सः । मिह॑म् । कृ॒ण्व॒न्ति॒ । अ॒वा॒ताम्॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:38» Mantra:7 | Ashtak:1» Adhyay:3» Varga:16» Mantra:2 | Mandal:1» Anuvak:8» Mantra:7


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर वे कैसे हों, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! तुम लोग जैसे (धन्वन्) अन्तरिक्ष में (त्वेषाः) बाहर भीतर घिसने से उत्पन्न हुई बिजुली में प्रदीप्त (अमवन्तः) जिन का रोगों और गमनागमन रूप वालों के साथ सम्बन्ध है (रुद्रियासः) प्राणियों के जीने के निमित्त वायु (अवाताम्) हिंसा रहित (मिहम्) सींचनेवाली वृष्टि को (आकृण्वन्ति) अच्छे प्रकार संपादन करते हैं और इन का (सत्यम्) सत्य कर्म है (चित्) वैसे ही सत्य कर्म का अनुष्ठान किया करो ॥७॥
Connotation: - मनुष्यों को चाहिये कि जैसे अन्तरिक्ष में रहने तथा सत्यगुण और स्वभाववाले पवन वृष्टि के हेतु हैं वे ही युक्ति से सेवन किये हुए अनुकूल होकर सुख देते और युक्ति रहित सेवन किये प्रतिकूल होकर दुःखदायक होते हैं वैसे युक्ति से धर्मानुकूल कर्मों का सेवन करें ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अवाता वृष्टि

Word-Meaning: - १. प्राण (सत्यम्) - सचमुच (त्वेषाः) - दीप्तिवाले बनते हैं । प्राणसाधना से बुद्धि तीव्र होकर हमें ज्ञान से दीप्त बनाती है ।  २. ये प्राण (अमवन्तः) - बलवाले हैं । प्राणसाधना से वीर्य की ऊर्ध्वगति होकर शरीर में शक्ति स्थिर रहती है ।  ३. (धन्वन् चित्) - [प्रणवो धनुः] प्रणवरूप धनुष के होने पर ये प्राण (रुद्रियासः) - वासनाओं को रुलानेवाले हैं, अर्थात् प्राणसाधना होने पर प्रभु की ओर झुकाव होता ही है, उस प्रभु का नाम 'ओम्' हमारा धनुष बनता है और इस धनुष से हम कामादि वासनाओं का विनाश करनेवाले बनते हैं । ४. ये प्राण "प्राणापानगती रुद्ध्वा प्राणायामपरायणाः" - इन शब्दों के अनुसार गतिरोध होने पर (अवाताम्) - बिना वायुवाली (मिहं कृण्वन्ति) - वर्षा करते हैं । प्राणनिरोध होने पर अन्तः करण में एक अद्भुत आनन्द का अनुभव होता है । यही 'अवाता वृष्टि' है ।   
Connotation: - भावार्थ - प्राणसाधना से 'ज्ञानदीप्त, बल, आनन्द की वृष्टि' प्राप्त होती है । ओम् को धनुष बनाकर हम काम - क्रोधादि शत्रुओं का नाश कर पाते हैं ।   

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(सत्यम्) अविनाशि गमनागमनाख्यं कर्म (त्वेषाः) बाह्याम्यन्तरघर्षणेनोत्पन्नविद्युदग्निना प्रदीप्ताः। (अमवन्तः) अमानां रोगानां गमनागमनबलानां वा संबन्धो विद्यते एषान्ते। अत्र संबंधार्थे मतुम्। अम रोगे। अमगत्यादिषु चेत्यस्माद्हलश्च# इति करणाधिकरणयोर्घञ्। अमन्ति रोगं प्राप्नुवन्ति यद्वाऽमंति गच्छंत्यागच्छन्ति बलयन्ति यैस्तेऽमाः (धन्वन्) धन्वन्यन्तरिक्षे मरुस्थले वा। धन्वेत्यन्तरिक्षनामसु पठितम्। निघं० १।३। पदना० च। निघं०। ४।२। (चित्) उपमार्थे (आ) अभितः (रुद्रियासः) रुद्राणां जीवानामिमे जीवननिमित्ता रुद्रिया वायवः। तस्येदम् +इति शैषिको घः। आज्जसरेसुग् इत्यसुगागमः (मिहम्) मेहति सिंचति यया तां वृष्टिम् (कृण्वन्ति) कुर्वन्ति (अवाताम्) अविद्यमाना वातो यस्यास्ताम् ॥७॥ #[अ० ३।३।१२१।] +[अ० ४।३।१२०।]

Anvay:

पुनस्ते कीदृशा भवेयुरित्युपदिश्यते।

Word-Meaning: - हे मनुष्या यूयं धन्वन्नन्तरिक्षे त्वेषा अमवन्तो रुद्रियासो मरुतो वर्त्तन्तेऽवातां मिहं वृष्टिमाकृण्वंति तेषां मरुतां सत्यकर्मास्ति चिदिवानुतिष्ठत ॥७॥
Connotation: - मनुष्यैर्यथा येन्तरिक्षस्थाःसत्यगुणस्वभावा वायवो वृष्टिहेतवः सन्ति त एव युक्त्या परिचरिता अनुकूला सन्तः सुखयन्ति। अयुक्त्या सेविताः प्रतिकूलाः सन्तश्च दुःखयन्ति तथा युक्त्या धर्माऽनुकूलानि कर्माणि सेव्यानि ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - The bright and blazing lightning winds, strong and impetuous in the sky, sustained benefactors of living life, cause ceaseless showers of rain on the thirsty earth. And that is truly the divine work of nature (which the human beings should emulate).

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Anvay:

O men, you should truly behave like the winds in the firmament that are powerful and kindled with electricity caused by internal and external rubbing, giving life to the soul and causing no withered day or rains over even the desert.

Word-Meaning: - ( त्वेषाः ) बाह्याभ्यन्तरघर्षणेनोत्पन्ना विद्युदग्निना प्रदीप्ताः । = Kindled by electricity and caused by external and internal rubbing. ( अमवन्तः ) अमानां रोगाणां गमनागमनबलानां वा सम्वन्धो विद्यते येषां ते । अत्र सम्बन्धार्थे मतुप् । अमरोगे । अम गत्यादिषु च इत्यस्माद् हलादेश्च इति करणाधिकरणयोः घञ् अमन्ति रोगं प्राप्नुवन्ति यद् वा अमन्ति गच्छन्त्यागच्छन्ति बलयन्ति यैः ते । = Causing disease when taken in impurely. ( धन्वन् ) धन्वनि-अन्तरिक्षे मरुस्थले वा धन्वेत्यन्तरिक्षनामसु पठितम् ( निघ० १.३ ) पद नामसु च ( निघ० ४.२ ) | = In the middle regions or desert ( रुद्रियास: ) रुद्राणां जीवानाम् इमे जीवननिमित्तारुद्रिया वायवः = Airs beneficials for the souls. (मिहम् ) मेहति सिंचति यथा तां वृष्टिम् = Rain.
Connotation: - Men should perform all righteous deeds with proper use of winds that are in the firmament, causing rains and possessing some true characteristics. When suitably used, they give happiness, but when used improperly, they become adverse and cause misery, therefore men should perform all righteous acts methodically.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जसे अंतरिक्षात राहणारे सत्यगुण (अविनाशी गमनागमन) स्वभावाचे वायू वृष्टीचे हेतू आहेत. युक्तीने स्वीकारल्यास तेच अनुकूल बनून सुख देतात व युक्तिरहित अंगीकार केल्यास प्रतिकूल बनून दुःखदायक ठरतात. तसे युक्तीने माणसांनी धर्मानुकूल कर्मांचे सेवन करावे. ॥ ७ ॥