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स्थि॒रा वः॑ सन्तु ने॒मयो॒ रथा॒ अश्वा॑स एषाम् । सुसं॑स्कृता अ॒भीश॑वः ॥

English Transliteration

sthirā vaḥ santu nemayo rathā aśvāsa eṣām | susaṁskṛtā abhīśavaḥ ||

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Pad Path

स्थि॒राः । वः॒ । स॒न्तु॒ । ने॒मयः॑ । रथाः॑ । अश्वा॑सः । ए॒षा॒म् । सुसं॑स्कृताः । अ॒भीश॑वः॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:38» Mantra:12 | Ashtak:1» Adhyay:3» Varga:17» Mantra:2 | Mandal:1» Anuvak:8» Mantra:12


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर भी उक्त विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

Word-Meaning: - हे विद्वान् लोगो ! (वः) तुम्हारे (एषाम्) इन पवनों के सकाश से (सुसंस्कृताः) उत्तम शिल्प विद्या से संस्कार किए हुए (नेमयः) कलाचक्र युक्त (रथाः) विमान आदि रथ (अभीशवः) मार्गों को व्याप्त करनेवाले (अश्वासः) अग्नि आदि वा घोड़ों के सदृश (स्थिराः) दृढ़ बलयुक्त (सन्तु) होवें ॥१२॥
Connotation: - ईश्वर उपदेश करता है। हे मनुष्यो ! तुमको चाहिये कि अनेक प्रकार के कलाचक्र युक्त विमान आदि यानों को रच कर उनमें जल्दी चलनेवाले अग्नि जल के सम्प्रयोग वा पवनों के योग से सुख पूर्वक जाने-आने और शत्रुओं को जीतने आदि सब व्यवहारों को सिद्ध करो ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

रथ का सौन्दर्य

Word-Meaning: - १. हे प्राणसाधको ! (वः) - तुम्हारे (नेमयः) - रथचक्रों की परिधियाँ (स्थिराः सन्तु) - स्थिर हों । शरीर ही रथ है । इस शरीर - रथ के कर्म ही चक्र हैं । उन कर्मों की मर्यादाएँ ही इन चक्रों की नेमियाँ हैं । ये मर्यादाएँ स्थिर हों, अर्थात् तुम्हारे सब कर्म मर्यादित हों ।  २. (एषाम्) - इन प्राणसाधकों के (रथाः) - रथ स्थिर हों, अर्थात् शरीर सुदृढ़ हों, शरीर पर किसी प्रकार की व्याधि का आक्रमण न हो पाये ।  ३. (अश्वासः) - इनके अश्व भी स्थिर हों । इन्द्रियाँ ही घोड़े हैं । ये इन्द्रियाँ क्षीण शक्तिवाली न हों ।  ४. (अभीशवः) - लगामें भी (सुसंस्कृताः) - उत्तम रूप से परिष्कृत हों । मन ही लगाम है । 'चित्तवृत्तियों' के बहुत होने पर यहाँ 'अभीशवः' शब्द बहुवचन में है । प्राणसाधकों की चित्तवृत्तियों बड़ी परिष्कृत होती हैं । वस्तुतः प्राणसाधना का सर्वप्रथम लाभ ही इन चित्तवृत्तियों के निरोध के द्वारा चित्त पर ही पड़ता है । चित्त का परिष्कार ही प्राणसाधना का सर्वोत्तम लाभ है ।   
Connotation: - भावार्थ - प्राणसाधना शरीररूप रथ को, इन्द्रियाश्वों को, मनरूप लगाम को, कर्मरूप चक्रपरिधियों को सुन्दर बनाती है ।   

SWAMI DAYANAND SARSWATI

(स्थिराः) दृढाः (वः) युष्माकम् (सन्तु) भवन्तु (नेमयः) कलाचक्राणि (रथाः) विमानादीनि यानानि (अश्वासः) अग्न्यादयस्तुरङ्गा वा। अत्र आञ्जसेरसुग् इत्यसुगागमः। (एषाम्) मरुतां साकाशात् (अभीशवः) अभितो श्नुवते व्याप्नुवन्ति मार्गान्यैस्तेरश्मयो हया वा। अत्राभिपूर्वादशूङ् व्याप्तावित्यस्माद्धातोः। कृवाया० उ० १।१। इत्युण् वर्णव्यत्ययेनाकारस्थान ईकारश्च ॥१२॥

Anvay:

पुनस्तदेवाह।

Word-Meaning: - हे विद्वांसो मनुष्या वो युष्माकमेषां मरुतां सकाशात्सुसंस्कृता नेमयो रथा अभिशवोऽश्वासश्च स्थिराः सन्तु ॥१२॥
Connotation: - ईश्वर उपदिशति। हे मनुष्या युष्माभिर्विविधकलाचक्राणि यानानि रचयित्वा तेष्वग्निजलादीनां शीघ्रं यातॄणां संप्रयोगेण वायूनां योगात्सुखेन सर्वतो गमनागमनानि शत्रुविजयादयः सर्वे व्यवहाराः संसाधनीया इति ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let the wheels of your chariots be strong and steady. May your chariots of horse and fire be strong by wind and electric energy. Let the reins and steering be very sensitive and sophisticated.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject is continued.

Anvay:

O learned men, may the fellies of your wheels be firm, May your chariots of various kinds including aero planes be stead and your horses o fire etc. be properly trained and utilized ; and may your rains be fashioned well.

Word-Meaning: - ( नेमय: ) कलाचक्राणि = Fellies and wheels of the machines. (रथा:) विमानादीनि यानानि = Vehicles like aero planes etc. (अश्वास:) अग्न्यादयः तुरंगा वा । अत्र आज्जसेरसुक् इत्यसुगागमः = Horses or fire etc. (अभीशवः) अभितः अश्नुवते व्याप्नुवन्ति मार्गान् यैः ते रश्मयो हया वा = Reins or horses. अत्र अभिपूर्वकात् अशुङ् व्याप्तौ इति धातोः कृवापाजिनिस्वदिसाध्यशूभ्य उण ( उणादि० १.१ ) इत्युण वर्णन्यत्ययेनाकारस्थान ईकारश्च ।
Connotation: - God instructs: O men, you should manufacture many kinds of vehicles endowed with various machines, use fire and water etc. and with their combination and that of the gases you should be able to move quickly everywhere, should get victory over your enemies and accomplish all works.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - ईश्वर उपदेश करतो - हे माणसांनो ! तुम्ही अनेक प्रकारच्या कलाचक्रांनी युक्त विमान इत्यादी यानांना निर्माण करून त्यात अग्नी व जलाच्या संप्रयोगाने, वायूच्या योगाने सुखपूर्वक गमनागमन व शत्रूंवर विजय इत्यादी व्यवहारांना सिद्ध करा. ॥ १२ ॥