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अग्ने॒ पत्नी॑रि॒हाव॑ह दे॒वाना॑मुश॒तीरुप॑। त्वष्टा॑रं॒ सोम॑पीतये॥

English Transliteration

agne patnīr ihā vaha devānām uśatīr upa | tvaṣṭāraṁ somapītaye ||

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Pad Path

अग्ने॑। पत्नीः॑। इ॒ह। आ। व॒ह॒। दे॒वाना॑म्। उ॒श॒तीः। उप॑। त्वष्टा॑रम्। सोम॑ऽपीतये॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:22» Mantra:9 | Ashtak:1» Adhyay:2» Varga:5» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:5» Mantra:9


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर अगले मन्त्र में अग्नि के गुणों का उपदेश किया है-

Word-Meaning: - (अग्ने) जो यह भौतिक अग्नि (सोमपीतये) जिस व्यवहार में सोम आदि पदार्थों का ग्रहण होता है, उसके लिये (देवानाम्) इकत्तीस जो कि पृथिवी आदि लोक हैं, उनकी (उशतीः) अपने-अपने आधार के गुणों का प्रकाश करनेवाला (पत्नीः) स्त्रीवत् वर्त्तमान अदिति आदि पत्नी और (त्वष्टारम्) छेदन करनेवाले सूर्य्य वा कारीगर को (उपावह) अपने सामने प्राप्त करता है, उसका प्रयोग ठीक-ठीक करें॥९॥
Connotation: - विद्वानों को उचित है कि जो बिजुली प्रसिद्ध और सूर्य्यरूप से तीन प्रकार का भौतिक अग्नि शिल्पविद्या की सिद्धि के लिये पृथिवी आदि पदार्थों के सामर्थ्य प्रकाश करने में मुख्य हेतु है, उसी का स्वीकार करें और यह इस शिल्पविद्यारूपी यज्ञ में पृथिवी आदि पदार्थों के सामर्थ्य का पत्नी नाम विधान किया है, उसको जानें॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

देवपत्नी आवहन

Word-Meaning: - १. हे (अग्ने) - प्रगतिशील व्यक्ति ! तू (इह) - इस मानव - जीवन में (उशतीः) - भले को चाहनेवाली (देवानां पत्नीः) - देवपत्नियों को (उपावह) - समीप प्राप्त करनेवाला हो । शरीर में सब देवों का निवास है - "सर्वा ह्यस्मिन् देवता गावो गोष्ठइवासते" [अ० ११/८/३२] इसमें सब देव इस प्रकार रहते हैं जैसे गोशाला में गौवें । इन सब देवों की शक्तियाँ ही उनकी पत्नियाँ कहलाती हैं । इनके होने पर मनुष्य - जीवन सुखी हो पाता है , अतः उन सब अङ्ग - प्रत्यङ्गों व इन्द्रियों की शक्ति की प्रार्थना की गई है ।  २. इन शक्तियों की प्राप्ति के लिए ही तू (त्वष्टरम्) - उस सबके निर्माता व दीप्ति के पुञ्ज प्रभु को पुकार , ताकि (सोमपीतये) - सोम की तू रक्षा कर सके । त्वष्टा की पुकार हमें भी त्वष्टा बनाएगी और जब हम निर्माण के कार्यों में लगे होंगे अथवा ज्ञानप्राप्ति में लगकर दीप्ति का पुञ्ज बनने का प्रयत्न करेंगे तो सब प्रकार के विलासों से बचकर सोम का रक्षण कर पाएंगे । इस सोम के रक्षण से हमारे सब अङ्ग सबल होंगे । यह अङ्ग - प्रत्यङ्ग की शक्ति ही देवपत्नी है । इन देवपत्नियों का यहाँ जीवन - यज्ञ में प्राप्त कराने का यही साधन है कि हम प्रभु - उपासन के द्वारा सोम का रक्षण करें । 
Connotation: - भावार्थ - हे प्रगतिशील जीव ! तू त्वष्टा का उपासक बनकर निर्माण के कार्यों और ज्ञान - प्राप्ति में लग । इससे तू सोम का रक्षण कर पाएगा और सोम - रक्षण से सब इन्द्रियों की शक्ति को प्राप्त करनेवाला होगा । 

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनरग्निगुणा उपदिश्यन्ते।

Anvay:

योऽयमग्निः सोमपीतये देवानामुशतीः पत्नीस्त्वष्टारं चोपावह समीपे प्रापयति तस्य प्रयोगो यथावत्कर्त्तव्यः॥९॥

Word-Meaning: - (अग्ने) अग्निर्भौतिकः (पत्नीः) पत्युर्नो यज्ञसंयोगे। (अष्टा०४.१.३३) अनेन ङीप् प्रत्ययो नकारादेशश्च। इयं वै पृथिव्यदितिः सेयं देवानां पत्नी। (श०ब्रा०५.२.५.४) देवानां पत्न्य उशत्योऽवन्तु नः। प्रावन्तु नस्तुजयेऽपत्यजननाय चान्नसंसननाय च। याः पार्थिवासो या अपामपि व्रते कर्मणि ता नो देव्यः सुहवाः शर्म यच्छन्तु शरणम्। अपि च ग्नाः व्यन्तु देवपत्न्य इन्द्राणीन्द्रस्य पत्न्यग्नाय्यग्नेः पत्न्यश्विन्यश्विनोः पत्नी राड् राजते रोदसी रुद्रस्य पत्नी वरुणानी च वरुणस्य पत्नी व्यन्तु देव्यः कामयन्तां य ऋतुः कालो जायानाम्। (निरु०१२.४५-४६) देवानां विदुषां पालनयोग्याऽग्न्यादीनां स्थित्यर्थेयं पृथिवी वर्त्तते तस्माद् दैवपत्नीत्युच्यते यस्मिन् यस्मिन् द्रव्ये या याः शक्तयः सन्ति, तास्तास्तेषां द्रव्याणां पत्न्य इवेत्युच्यन्ते (इह) अस्मिन् शिल्पयज्ञे (आ) समन्तात् (वह) वहति प्रापयति। अत्र व्यत्ययो लडर्थे लोट् च। (देवानाम्) पृथिव्यादीनामेकत्रिंशतः (उशतीः) स्वस्वाधारगुणप्रकाशयन्तीः (उप) सामीप्ये (त्वष्टारम्) छेदनकर्त्तारं सूर्य्यं शिल्पिनं वा (सोमपीतये) सोमानां पदार्थानां पीतिर्ग्रहणं यस्मिन् व्यवहारे तस्मै॥९॥
Connotation: - विद्वद्भिर्योऽग्निर्भौतिको विद्युत्पृथिवीस्थसूर्य्यरूपेण त्रिधा वर्त्तमानः शिल्पविद्यासिद्धये पृथिव्यादीनां सामर्थ्यप्रकाशको मुख्यहेतुरस्ति स स्वीकार्य्यः। अत्र शिल्पविद्यायज्ञे पृथिव्यादीनां संयोजनार्थत्वात् तत्तत्सामर्थ्यस्य पत्नीति संज्ञा विहिता॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, lord of light and life and evolution, bring home to us here those generous energies of heat and light which warmly and profusely feed and promote the life and joy of the earth and other sustaining powers of nature, and bring Tvashta, that divine artificer, who creates beautiful new forms of existence and promotes life.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The attributes of Agni are taught in the next Mantra.

Anvay:

The Agni which brings home to us the manifesting protective powers of the earth and other useful things possessing divine attributes for the proper use of all objects, the sun and the artist, should be scientifically and methodically utilized.

Word-Meaning: - (पत्नी:) यस्मिन् यस्मिन् द्रव्ये याः याः शक्तयः सन्ति ता: ताः तेषां द्रव्याणां पत्न्य इवेत्युच्यन्ते । The special protective powers of various objects. (उशती:) स्वस्वाधारगुणंप्रकाशयन्तीः = Manifesting their main attributes. (त्वष्टारम्) छेदनकतारं सूर्य शिल्पिनं वा । The piercing sun or the artist.
Connotation: - Learned people should accept the Agni in three forms of the fire, electricity and the sun as the most prominent means of accomplishment of arts and crafts and the manifestation of the powers of the earth and other objects. In this Yajna consisting of artistic activities, the special uniting powers of the earth and other objects have been named as their Patnis or wives so to speak.
Footnote: Quoting from the Nirukta of the sage Yaskacharya (Chap. 12) Rishi Dayananda has stated that the protective special powers of the earth, sun, moon, fire and other objects are metaphorically called their Patnis or wives. Sayanacharya, Wilson, Griffith and other translators of the Vedas have not understood this Vedic principle and have taken Agnaayi, Varunani Rudrani and others as the wives of the Gods. Wilson Translates the Mantra as "Agni, bring here the loving wives of the gods" etc. while Wilson uses “gods" in small letters, Griffith here as elsewhere translates the word देवा: as the Gods and renders it into English as 'O Agni, hither bring to us the willing spouses of the Gods." Such translation is entirely erroneous and misleading. उशती: is from वश-कान्तौ Here it is to be taken in the sense of manifesting the special attributes.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जो प्रसिद्ध अग्नी, विद्युत व सूर्य या तीन प्रकारचा भौतिक अग्नी शिल्पविद्येच्या सिद्धीसाठी पृथ्वी इत्यादी पदार्थ सामर्थ्याच्या प्रकाशाचा मुख्य हेतू आहे. विद्वानांनी त्याचाच स्वीकार करावा व या शिल्पविद्यारूपी यज्ञात पृथ्वी इत्यादी पदार्थांच्या सामर्थ्याला पत्नी नावाने संबोधलेले आहे, हे जाणावे. ॥ ९ ॥