Go To Mantra
Viewed 455 times

उप॒ त्मन्या॑ वनस्पते॒ पाथो॑ दे॒वेभ्य॑: सृज। अ॒ग्निर्ह॒व्यानि॑ सिष्वदत् ॥

English Transliteration

upa tmanyā vanaspate pātho devebhyaḥ sṛja | agnir havyāni siṣvadat ||

Mantra Audio
Pad Path

उप॑। त्मन्या॑। व॒न॒स्प॒ते॒। पाथः॑। दे॒वेभ्यः॑। सृ॒ज॒। अ॒ग्निः। ह॒व्यानि॑। सि॒स्व॒द॒त् ॥ १.१८८.१०

Rigveda » Mandal:1» Sukta:188» Mantra:10 | Ashtak:2» Adhyay:5» Varga:9» Mantra:5 | Mandal:1» Anuvak:24» Mantra:10


SWAMI DAYANAND SARSWATI

अब देनेवाले के विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

Word-Meaning: - हे (वनस्पते) वनों के पालनेवाले ! (त्मन्या) अपने बीच उत्तम क्रिया से जैसे (अग्निः) अग्नि (देवेभ्यः) विद्वान् वा दिव्य गुणों के लिये (हव्यानि) भोजन करने योग्य पदार्थों को (सिष्वदत्) स्वादिष्ठ करता है वैसे आप विद्वान् वा दिव्य गुणों के लिये (पाथः) अन्न को (उप, सृज) उनके लिये देओ ॥ १० ॥
Connotation: - इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जो वनादिकों की रक्षा से घास, फूस और ओषधियों को बढ़ाते हैं, वे सबका उपकार करने योग्य होते हैं ॥ १० ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वानस्पतिक भोजन

Word-Meaning: - १. गतमन्त्र के अनुसार विविध प्रकार से सहायक ये पशु हमें प्राप्त हों, परन्तु 'हमें इनके मांस का प्रयोग नहीं करना है', इस बात को स्पष्ट करने के लिए कहते हैं कि हे (वनस्पते) = ओषधे ! तू (त्मन्या) = स्वयं (देवेभ्यः) = देववृत्तिवाले पुरुषों के लिए (पाथः) = अन्न को (उपसृज) = समीपता से उत्पन्न कर, अर्थात् देववृत्ति के पुरुष वानस्पतिक भोजन ही करनेवाले हों । २. (अग्नि:) = प्रगतिशील व्यक्ति (हव्यानि) = हव्य पदार्थों को ही (सिष्वदत्) = आस्वादित करता है। यज्ञिय पवित्र पदार्थों का ही भोजन करता हुआ वह सात्त्विक वृत्तिवाला बनता है।
Connotation: - भावार्थ - मनुष्य का भोजन औषधि व वनस्पति ही है।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

अथ दातृविषयमाह ।

Anvay:

हे वनस्पते त्मन्या तथाऽग्निर्देवेभ्यो हव्यानि सिष्वदत्तथा त्वं देवेभ्य पाथ उपसृज ॥ १० ॥

Word-Meaning: - (उप) (त्मन्या) आत्मनि साध्व्या क्रियया (वनस्पते) वनानां पालक (पाथः) अन्नम् (देवेभ्यः) विद्वद्भ्यो दिव्यगुणेभ्यो वा (सृज) (अग्निः) पावकः (हव्यानि) अत्तव्यानि (सिष्वदत्) स्वादूकरोति ॥ १० ॥
Connotation: - अत्र वाचकलुप्तोपमालङ्कारः। ये वनादिरक्षणेन तृणौषधीन् वर्द्धयन्ति ते सर्वोपकारं कर्त्तुं योग्या जायन्ते ॥ १० ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O Vanaspati, lord of herbs and trees and forests, create, produce and give the best of food and nourishments to the noble and virtuous people of virtue with the sincerity of your mind and soul, as fire helps to prepare the sweetest delicacies for entertainment of the divines.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

In the praise of a learned donor.

Anvay:

O protector of the forests as energy turns all the eatables into delicious, likewise with your admirable actions, we make (prepare) good meals for the enlightened persons.

Word-Meaning: - NA
Connotation: - Those who preserve and help the growth of the vegetables, herbs and plants, through the conservation of forests etc. they are able to deliver benefits to all.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या मंत्रात वाचकलुप्तोपमालंकार आहे. जे वनांचे रक्षण करून तृण वगैरे तसेच औषधींची वाढ करतात ते सर्वांवर उपकार करणारे असतात. ॥ १० ॥