Go To Mantra
Viewed 607 times

हिर॑ण्यशृ॒ङ्गोऽयो॑ अस्य॒ पादा॒ मनो॑जवा॒ अव॑र॒ इन्द्र॑ आसीत्। दे॒वा इद॑स्य हवि॒रद्य॑माय॒न्यो अर्व॑न्तं प्रथ॒मो अ॒ध्यति॑ष्ठत् ॥

English Transliteration

hiraṇyaśṛṅgo yo asya pādā manojavā avara indra āsīt | devā id asya haviradyam āyan yo arvantam prathamo adhyatiṣṭhat ||

Mantra Audio
Pad Path

हिर॑ण्यऽशृ॒ङ्गः। अयः॑। अ॒स्य॒। पादाः॑। मनः॑ऽजवाः॑। अव॑रः। इन्द्रः॑। आ॒सी॒त्। दे॒वाः। इत्। अ॒स्य॒। ह॒विः॒ऽअद्य॑म्। आ॒य॒न्। यः। अर्व॑न्तम्। प्र॒थ॒मः। अ॒धि॒ऽअति॑ष्ठत् ॥ १.१६३.९

Rigveda » Mandal:1» Sukta:163» Mantra:9 | Ashtak:2» Adhyay:3» Varga:12» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:22» Mantra:9


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! जो ऐसा है कि (हिरण्यशृङ्गः) जिसके तेजःप्रकाश शृङ्गों के समान हैं तथा जिस (अस्य) इस बिजुलीरूप अग्नि के (मनोजवाः) मन के समान वेगवाले (अयः) प्राप्तिसाधक धातु (पादाः) जिनसे चलें उन पैरों के समान है, वह (अवरः) एक निराला (इन्द्रः) सूर्य (आसीत्) है और (यः) जो (प्रथमः) विख्यात, (अर्वन्तम्) वेगवाले अश्वरूप अग्नि का (अध्यतिष्ठत्) अधिष्ठाता होता जिस (अस्य) इसके सम्बन्ध में (हविरद्यम्) खाने योग्य होमने के पदार्थ (इत्) ही को (देवाः) विद्वान् वा भूमि आदि तेंतीस देव (आयन्) प्राप्त हैं वह बहुतों में व्याप्त होनेवाला बिजुली के समान अग्नि है ऐसा जानो ॥ ९ ॥
Connotation: - इस जगत् में तीन प्रकार का अग्नि है। एक अति सूक्ष्म जो कारण रूप कहाता, दूसरा वह जो सूक्ष्म मूर्त्तिमान् पदार्थों में व्याप्त होनेवाला और तीसरा स्थूल सूर्यादि स्वरूपवाला, जो इसको गुण, कर्म, स्वभाव से जानकर इसका अच्छे प्रकार प्रयोग करते हैं, वे निरन्तर सुखी होते हैं ॥ ९ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'हिरण्यशृङ्ग, अयः पाद, मनोजवा'

Word-Meaning: - १. (यः) = जो (प्रथमः) = अपनी शक्तियों का विस्तार करनेवाला (अर्वन्तम् अधि अतिष्ठत्) = इन्द्रियाश्व का अधिष्ठाता बनता है, अर्थात् इन्द्रियों को अपने वश में करता है यह (हिरण्यशृङ्गः) = [हिरण्यं वै ज्योतिः] ज्योतिर्मय शिखरवाला होता है। इसका मस्तिष्क ज्ञान से परिपूर्ण होता है। (अस्य पाद:) = इसके पाँव (अयः) = लोहे के होते हैं, अर्थात् यह चलने में थक नहीं जाता। 'मस्तिष्क उज्ज्वल, पाँव दृढ़' यह इसका जीवन होता है। २. प्रभु परमैश्वर्यशाली होने से इन्द्र हैं, यह भी (अवरः इन्द्रः) = छोटा इन्द्र ही बनता है और (मनोजवा आसीत्) = मन के वेगवाला होता है। इसकी मानस शक्तियाँ शिथिल नहीं पड़ जातीं । ३. (देवा:) = विद्वान् अतिथि (इत्) = निश्चय से (अस्य) = इसके (अद्यं हविः) = खाने योग्य सात्त्विक भोजनों को आयन् प्राप्त होते हैं, अर्थात् इसके घर पर अतिथियों का आना-जाना बना रहता है। इनका आना-जाना इसे सदा उत्कृष्ट प्रेरणा प्राप्त कराता है।
Connotation: - भावार्थ - जितेन्द्रिय पुरुष दीप्त ज्ञानवाला, दृढ़ शरीरवाला व प्रबल मानस शक्तियोंवाला बनता है।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ।

Anvay:

हे मनुष्या यो हिरण्यशृङ्गो यस्याऽस्य मनोजवा अयः पादाः सन्ति सोऽवर इन्द्र आसीत्। यः प्रथमोऽर्वन्तमध्यतिष्ठद्यस्याऽस्य हविरद्यमिद्देवा आयन् स बहुव्यापी विद्युद्विधोऽग्निरस्तीति विजानीत ॥ ९ ॥

Word-Meaning: - (हिरण्यशृङ्गः) हिरण्यानि तेजांसि शृङ्गाणीव यस्य सः (अयः) प्राप्तिसाधकाः धातवः (अस्य) विद्युद्रूपस्याऽग्नेः (पादाः) पद्यन्ते गच्छन्ति यैस्त इव (मनोजवाः) मनोवद्वेगवन्तः (अवरः) अर्वाचीनः (इन्द्रः) सूर्य्यः (आसीत्) अस्ति (देवाः) विद्वांसो भूम्यादयो वा (इत्) एव (अस्य) (हविरद्यम्) अत्तुं योग्यम् (आयन्) आप्नुवन्ति (यः) (अर्वन्तम्) वेगवन्तमग्निमश्वम् (प्रथमः) प्रख्यातः (अध्यतिष्ठत्) अधिष्ठाता भवति ॥ ९ ॥
Connotation: - अस्मिञ्जगति त्रिधाऽग्निर्वर्त्तते एकोऽतिसूक्ष्मः कारणाख्यो द्वितीयः सूक्ष्मो मूर्त्तद्रव्यव्यापी तृतीयः स्थूलः सूर्यादिस्वरूपो य इमं गुणकर्मस्वभावतो विज्ञाय संप्रयुञ्जते ते सततं सुखिनो भवन्ति ॥ ९ ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Golden headed and lustrous is this agni, energy and power of nature, with the wheels of metals of desired gravity for motion and speed. The noblest divinities love to win and enjoy the cherished gifts of this agni. Indra, constant, ancient and yet the latest lord of the speed of mind is the exceptional master who first of all rides and controls this dynamic energy of nature’s motive power.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

The same subject is continued.

Anvay:

O men ! you should seek that Agni in the form of energy etc. which has splendors like the horse. It's feet (means of movement) are quick like the mind and are made of varying metals etc. It ( electricity or sun ) in lustrous like lightning. Learned scientists use it properly and methodically, when a famous person rides over this horse in the form of Agni (fire, electricity).

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - There is Agni of three kinds in this world. The first is in causal, very subtle form (2) The second is in its subtle form pervading gross objects like electricity (3) The third is gross in the form of material fire and the sun. Those men enjoy happiness who utilize it methodically, having known its attributes, working and nature.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - या जगात तीन प्रकारचे अग्नी आहेत. एक अति सूक्ष्म जो कारणरूप म्हणविला जातो. दुसरा सूक्ष्म मूर्तिमान पदार्थात व्याप्त असतो व तिसरा स्थूल सूर्य इत्यादी स्वरूपाच्या रूपात असतो जे त्याच्या गुण, कर्म स्वभावाला जाणून त्याचा चांगल्या प्रकारे उपयोग करतात ते निरन्तर सुखी होतात. ॥ ९ ॥