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उ॒प॒स्थायं॑ चरति॒ यत्स॒मार॑त स॒द्यो जा॒तस्त॑त्सार॒ युज्ये॑भिः। अ॒भि श्वा॒न्तं मृ॑शते ना॒न्द्ये॑ मु॒दे यदीं॒ गच्छ॑न्त्युश॒तीर॑पिष्ठि॒तम् ॥

English Transliteration

upasthāyaṁ carati yat samārata sadyo jātas tatsāra yujyebhiḥ | abhi śvāntam mṛśate nāndye mude yad īṁ gacchanty uśatīr apiṣṭhitam ||

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Pad Path

उ॒प॒ऽस्थाय॑म्। च॒र॒ति॒। यत्। स॒म्ऽआर॑त। स॒द्यः। जा॒तः। त॒त्सा॒र॒। युज्ये॑भिः। अ॒भि। श्वा॒न्तम्। मृ॒श॒ते॒। ना॒न्द्ये॑। मु॒दे। यत्। ई॒म्। गच्छ॑न्ति। उ॒श॒तीः। अ॒पि॒ऽस्थि॒तम् ॥ १.१४५.४

Rigveda » Mandal:1» Sukta:145» Mantra:4 | Ashtak:2» Adhyay:2» Varga:14» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:21» Mantra:4


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है ।

Word-Meaning: - हे जिज्ञासु जनो ! (यत्) जो (युज्येभिः) युक्त करने योग्य पदार्थों के साथ (सद्यः) शीघ्र (जातः) प्रसिद्ध हुआ (उपस्थायम्) क्षण क्षण उपस्थान करने को (चरित) जाता है वा (तत्सार) कुटिलपन से जावे वा (श्वान्तम्) परिपक्व पूरे ज्ञान को (अभिमृशते) सब ओर से विचारता है वा बुद्धिमान् जन (यम्) जिस (नान्द्ये) अति आनन्द और (मुदे) सामान्य हर्ष होने के लिये (अपिस्थितम्) स्थिर हुए को और (उशतीः) कामना करती हुई पण्डिताओं को (ईम्) सब ओर से (गच्छन्ति) प्राप्त होते उसको तुम (समारत) अच्छे प्रकार प्राप्त होओ ॥ ४ ॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जो बालक और जो कन्या शीघ्र पूर्ण विद्यायुक्त होते हैं और कुटिलतादि दोषों को छोड़ शान्ति आदि गुणों को प्राप्त होकर सबको विद्या तथा सुख होने के लिये बार-बार प्रयत्न करते हैं, वे जगत् को आनन्द देनेवाले होते हैं ॥ ४ ॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

भक्त प्रभु की और प्रभु भक्त की ओर

Word-Meaning: - १. जब एक भक्त प्रत्येक कार्य को (उपस्थायं चरति) = [उपस्थाय उपस्थाय चरति - सा०] प्रभु की उपासना के साथ करता है, (यत्) = और जब (समारत) = उस प्रभु के साथ सङ्गत होता है, अर्थात् प्रातः-सायं प्रभु के ध्यान में बैठता है तब वे प्रभु (सद्यः जातः) = शीघ्र प्रकट हुए हुए (युज्येभिः) = इन योगयुक्त पुरुषों को (तत्सार) = [त्सर - to go or approach gently] शान्ति से प्राप्त होते हैं। (श्वान्तम्) = [श्वि गतिवृद्धयोः] गतिशील व वर्धमान [शक्तियों का वर्धन करते हुए] पुरुष को (अभिमृशते) = प्रभु स्पर्श करते हैं। गतिशील, वर्धमान पुरुष का प्रभु से मेल होता है। यह मेल (नान्द्ये) = [नन्द्-समृद्धौ] समृद्धि के होने पर (मुदे) = हर्ष के लिए होता है। प्रभु के मेल से अभ्युदय की प्राप्ति होती है और आनन्द की वृद्धि होती है। २. यह सब होता तभी है (यत्) = जब (ईम्) = निश्चय से (उशती:) = प्रभु से मेल की कामनावाली ये प्रजाएँ (अपिष्ठितम्) = सर्वत्र व्याप्त होकर वर्तमान उस प्रभु की ओर (गच्छन्ति) = जाती हैं।
Connotation: - भावार्थ - भक्त जब प्रभु के स्मरण के साथ ही प्रत्येक कार्य को करता है तब प्रभु भी उसे प्राप्त होते हैं। यह प्रभु से मेल अभ्युदय व आनन्द का कारण होता है।

SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनस्तमेव विषयमाह ।

Anvay:

हे जिज्ञासवो जना यद्यो युज्येभिस्सह सद्यो जात उपस्थायं चरति तत्सार श्वान्तमभिमृशते बुद्धिमन्तो यद्यं नान्द्ये मुदेऽपिस्थितमुशतीरीं गच्छन्तिं तं यूयं समारत ॥ ४ ॥

Word-Meaning: - (उपस्थायम्) अभिक्षणमुपस्थातुम् (चरति) गच्छति (यत्) यः (समारत) सम्यक् प्राप्नुत (सद्यः) शीघ्रम् (जातः) प्रसिद्धः (तत्सार) तत्सरेत् (युज्येभिः) योजितुं योग्यैः सह (अभि) (श्वान्तम्) श्रान्तं परिपक्वज्ञानम्। अत्र वर्णव्यत्ययेन रेफस्य स्थाने वः। (मृशते) (नान्द्ये) आनन्दाय (मुदे) मोदनाय (यत्) यम् (ईम्) सर्वतः (गच्छन्ति) (उशतीः) कामयमाना विदुषीः (अपिस्थितम्) ॥ ४ ॥
Connotation: - हे मनुष्या ये याश्च सद्यः पूर्णविद्या जायन्ते कुटिलतादिदोषान् विहाय शान्त्यादिगुणान् प्राप्य सर्वेषां विद्यासुखाय अभीक्ष्णं प्रयतन्ते ते जगदानन्ददायकाः सन्ति ॥ ४ ॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When the devotee approaches this brilliant Agni with holy offerings, it instantly responds, rises, grows and expands with its flames. When the maidens with love and faith approach it, it provides soothing touches of caress and reflection for their peace and joy in a state of tranquillity.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Again in the praise of the enlightened.

Anvay:

O seekers after truth ! approach that wise leader, whose companions confide in him, and who goes to others to help and stands by them where needed. Such a leader goes everywhere to discharge his duties, thinks over again and again about the mature knowledge. Intelligent persons approach him for getting joy and delight and redressal of their grievances. Women desiring good knowledge and guidance also approach such a person.

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - O men! those persons are givers of joy to the world who are endowed with all knowledge and endeavor. They impart delight of knowledge to all having given up crookedness and other evils and have attained peace and other virtues.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - हे माणसांनो ! जे बालक व ज्या कन्या लवकर पूर्ण विद्यायुक्त होतात व कुटिलता इत्यादी दोष सोडून शांती इत्यादी गुण प्राप्त करून सर्वांना विद्या आणि सुख मिळावे यासाठी वारंवार प्रयत्न करतात ते जगाला आनंद देणारे असतात. ॥ ४ ॥