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त्वं व॒लस्य॒ गोम॒तोऽपा॑वरद्रिवो॒ बिल॑म्। त्वां दे॒वा अबि॑भ्युषस्तु॒ज्यमा॑नास आविषुः॥

English Transliteration

tvaṁ valasya gomato pāvar adrivo bilam | tvāṁ devā abibhyuṣas tujyamānāsa āviṣuḥ ||

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Pad Path

त्वम्। व॒लस्य॑। गोऽम॑तः। अप॑। अ॒वः॒। अ॒द्रि॒ऽवः॒। बिल॑म्। त्वाम्। दे॒वाः। अबि॑भ्युषः। तु॒ज्यमा॑नासः। आ॒वि॒षुः॒॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:11» Mantra:5 | Ashtak:1» Adhyay:1» Varga:21» Mantra:5 | Mandal:1» Anuvak:3» Mantra:5


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर भी अगले मन्त्र में सूर्य्य के गुणों का उपदेश किया है-

Word-Meaning: - (अद्रिवः) जिसमें मेघ विद्यमान है, ऐसा जो सूर्य्यलोक है, वह (गोमतः) जिसमें अपने किरण विद्यमान हैं उस (अबिभ्युषः) भयरहित (बलस्य) मेघ के (बिलम्) जलसमूह को (अपावः) अलग-अलग कर देता है, (त्वाम्) इस सूर्य्य को (तुज्यमानासः) अपनी-अपनी कक्षाओं में भ्रमण करते हुए (देवाः) पृथिवी आदिलोक (आविषुः) विशेष करके प्राप्त होते हैं॥५॥
Connotation: - जैसे सूर्य्यलोक अपनी किरणों से मेघ के कठिन-कठिन बद्दलों को छिन्न-भिन्न करके भूमि पर गिराता हुआ जल की वर्षा करता है, क्योंकि यह मेघ उसकी किरणों में ही स्थित रहता, तथा इसके चारों ओर आकर्षण अर्थात् खींचने के गुणों से पृथिवी आदि लोक अपनी-अपनी कक्षा में उत्तम-उत्तम नियम से घूमते हैं, इसी से समय के विभाग जो उत्तरायण, दक्षिणायन तथा ऋतु, मास, पक्ष, दिन, घड़ी, पल आदि हो जाते हैं, वैसे ही गुणवाला सेनापति होना उचित है॥५॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

' वल ' असुर का संहार

Word-Meaning: - १. हृदय - रूप गुफा वाह बिल में प्रभु का अधिष्ठान होने से वहां सारा ज्ञान विद्यमान है । इस हृदय गुफा में यह ज्ञान की रश्मिया ही ' गावः ' गौवें हैं । यह बिल गोमान् है । इस पर कामवासना का एक पर्दा सा पड़ जाया करता है   , यह 'वल' [veil] कहलाता है । गत मंत्र का " पुरुष्टुत " इस पर्दे को दूर कर देता है और उसके दूर होते ही ज्ञान - रश्मियों के प्रकाश से हमारा जीवन जगमगा उठता है । उस जीवन में देवताओं का निवास होता है मंत्र में कहते हैं कि - हे (अद्रिवः) वज्रवाले (अद्रि - वज्र) आदरणीय जीव  ! (त्वम्) तू (गोमतः) इस ज्ञान की रश्मिओं वाले (वलस्य) ज्ञान पर पर्दे के रूप में पड़े हुए काम रूप वृत्र को  (बिलम्) इस हृदय रूप गुहा को   , जिसपर की कुछ देर के लिए इस काम [वल] ने ही अधिकार कर लिया है । (अपावः) वज्र के प्रहार से काम को नष्ट करके खोल डालता है । "क्रियाशील जीवन" ही वज्र है   , इस वज्र से इंद्र - जीव काम को नष्ट कर डालता है । इस बिल से खुलते ही   , कामरूप पर्दे के हटते ही ज्ञान का प्रकाश फैल जाता है और   , २. (त्वाम्) - इस बल नामक असुर का नाश करनेवाले को (देवाः) - सब दिव्यवृत्तियाँ (आविषुः) - व्याप्त कर लेती हैं   , तेरा जीवन दिव्यतामय हो जाता है । ये देव (अविभ्युषः) - भय से रहित हैं। दिव्यवृत्तियों का प्रारंभ " अभय " से ही होता है । ये देव (तुज्यमानसः) - (to guard   , to protect) सदा रक्षित किए जाने योग्य हैं । असुरों के सतत आक्रमण से इनके नाश का भय बना ही रहता है ।
Connotation: - भावार्थ - हम ' वल ' ज्ञान के आवरणभूत काम का संहार कर हृदय को ज्ञान रश्मिओं से द्योतित करें और जीवन को दिव्यवृत्तियों से व्याप्त करें । इस असुर का संहार करके ही हम सब ' जेता ' बनते हैं । 
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनरपि तस्य गुणा उपदिश्यन्ते।

Anvay:

योऽद्रिवो मेघवानिन्द्रः सूर्य्यलोको गोमतोऽबिभ्युषो बलस्य मेघस्य बिलमपावोऽपवृणोति, त्वां तमिमं तुज्यमानासो देवा दिव्यगुणा भ्रमन्तः पृथिव्यादयो लोका आविषुर्व्याप्नुवन्ति॥५॥

Word-Meaning: - (त्वम्) अयम् (वलस्य) मेघस्य। वल इति मेघनामसु पठितम्। (निघं०१.१०) (गोमतः) गावः संबद्धा रश्मयो विद्यन्ते यस्य तस्य। अत्र सम्बन्धे मतुप्। (अप) क्रियायोगे (अवः) दूरीकरोत्युद्घाटयति। अत्र पुरुषव्यत्ययः, लडर्थे लङ्। बहुलं छन्दसीत्याडभावश्च। (अद्रिवः) बहवोऽद्रयो मेघा विद्यन्ते यस्मिन्सः। अत्र भूम्न्यर्थे मतुप्। छन्दसीर इति मतुपो मकारस्य वत्त्वम्। मतुवसो रु सम्बुद्धौ छन्दसि। (अष्टा०८.३.१) इति नकारस्थाने रुरादेशश्च। अद्रिरिति मेघनामसु पठितम्। (निघं०१.१०) (बिलम्) जलसमूहम्। बिलं भरं भवति बिभर्तेः। (निरु०२.१७) (त्वाम्) तमिमम् (देवाः) दिव्यगुणाः पृथिव्यादयः (अबिभ्युषः) बिभेति यस्मात् स बिभीवान्न बिभीवानबिभीवान् तस्य (तुज्यमानासः) कम्पमानाः स्वां स्वां वसतिमाददानाः (आविषुः) अभितः स्वस्वकक्षां व्याप्नुवन्ति। अत्र लडर्थे लुङ्। अयं व्याप्त्यर्थस्याऽवधातोः प्रयोगः॥५॥
Connotation: - यथा सूर्य्यः स्वकिरणैर्घनाकारं मेघं छित्वा भूमौ निपातयति, यस्य किरणेषु मेघस्तिष्ठति, यस्याभित आकर्षणेन पृथिव्यादयो लोकाः स्वस्वकक्षायां सुनियमेन भ्रमन्ति, ततोऽयनर्त्वहोरात्रादयो जायन्ते, तथैव सेनापतिना भवितव्यमिति॥५॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, blazing as the sun, wielder of the clouds, you break open the water-hold of the clouds. The devas, planets, seekers of the lord of light and centre-home, moved round in orbit, hold on to their place in the solar family.
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ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

Anvay:

When the sun opens the cave of the clouds covering his rays, the earth and other worlds rotating separate the mass of water. This sun is attained by trembling and rotating earth etc.

Word-Meaning: - अद्विरिति मेघनामसु पठितम् ( निघ० १.१०) = Cloud (बिलम्) जलसमूहम् -बिलं भरं भवति विभेतः (निरु० २.१७)। (तुज्यमानासः ) कम्पमाना: तुज-हिंसाबलादाननिकेतनेषु ।
Connotation: - The sun breaks into pieces the solid cloud by his rays and makes it fall down upon the earth. It is by the gravitation of the sun that the earth and other worlds regularly rotate in their circumference by which are made the season and day and night etc. in the same way, the commander of an army should behave.
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MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - जसा सूर्यलोक आपल्या किरणांनी मेघांना छिन्नभिन्न करून भूमीवर वृष्टी करवितो, त्याच्या किरणात मेघ स्थित असतात. चारही बाजूंनी सूर्याच्या आकर्षण अर्थात खेचण्याच्या गुणामुळे पृथ्वी इत्यादी लोक आपापल्या कक्षेत उत्तमरीत्या फिरतात, त्यामुळेच काळाचे विभाग उत्तरायण व दक्षिणायन तसेच ऋतू, मास, पक्ष, दिन, क्षण, पळ इत्यादी होतात. तशाच गुणांचा सेनापती असावा. ॥ ५ ॥