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वि॒द्मा हि त्वा॒ वृष॑न्तमं॒ वाजे॑षु हवन॒श्रुत॑म्। वृष॑न्तमस्य हूमह ऊ॒तिं स॑हस्र॒सात॑माम्॥

English Transliteration

vidmā hi tvā vṛṣantamaṁ vājeṣu havanaśrutam | vṛṣantamasya hūmaha ūtiṁ sahasrasātamām ||

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Pad Path

वि॒द्म। हि। त्वा॒। वृष॑न्ऽतमम्। वाजे॑षु। ह॒व॒न॒ऽश्रुत॑म्। वृष॑न्ऽतमस्य। हू॒म॒हे॒। ऊ॒तिम्। स॒ह॒स्र॒ऽसात॑माम्॥

Rigveda » Mandal:1» Sukta:10» Mantra:10 | Ashtak:1» Adhyay:1» Varga:20» Mantra:4 | Mandal:1» Anuvak:3» Mantra:10


SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर भी मनुष्य लोग परमेश्वर को कैसा जानें, इस विषय का अगले मन्त्र में प्रकाश किया है-

Word-Meaning: - हे परमेश्वर ! हम लोग (वाजेषु) संग्रामों में (हवनश्रुतम्) प्रार्थना को सुनने योग्य और (वृषन्तमम्) अभीष्ट कामों के अच्छी प्रकार देने और जाननेवाले (त्वा) आपको (विद्म) जानते हैं, (हि) जिस कारण हम लोग (वृषन्तमस्य) अतिशय करके श्रेष्ठ कामों को मेघ के समान वर्षानेवाले (तव) आपकी (सहस्रसातमाम्) अच्छी प्रकार अनेक सुखों की देनेवाली जो (ऊतिम्) रक्षाप्राप्ति और विज्ञान हैं, उनको (हूमहे) अधिक से अधिक मानते हैं॥१०॥
Connotation: - मनुष्यों को सब कामों की सिद्धि देने और युद्ध में शत्रुओं के विजय के हेतु परमेश्वर ही देनेवाला है, जिसने इस संसार में सब प्राणियों के सुख के लिये असंख्यात पदार्थ उत्पन्न वा रक्षित किये हैं, तथा उस परमेश्वर वा उस की आज्ञा का आश्रय करके सर्वथा उपाय के साथ अपना वा सब मनुष्यों का सब प्रकार से सुख सिद्ध करना चाहिये॥१०॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वृषन्तम

Word-Meaning: - १. प्रभु की प्रेरणा को सुननेवाला 'मधुच्छन्दा' कहता है कि हे प्रभो ! हम (हि) - निश्चय से (त्वा) - आपको (वृषन्तमम्) - सब सुखों के सर्वाधिक वर्षक (विद्म) - जानते हैं । आप ही हमारी सब कामनाओं को पूर्ण करनेवाले हैं  , आपको छोड़कर कोई भी ऐसी शक्ति नहीं रखता कि हमारी सब कामनाओं को पूर्ण कर सके ।  २. आपको ही हम (वाजेषु) - सब संग्रामों में (हवनश्रुतम्) - हमारी पुकार सुननेवाला समझते हैं । संग्रामों के अवसर पर आप ही हमारे सहायक होते हैं । आपके साहाय्य के बिना इन संग्रामों में जीतना सम्भव ही नहीं होता ।  ३. (वृषन्तमस्य) - सब कामों के वर्षक आपकी (सहस्त्रसातमाम्) - हजारों धनों के देनेवाले (ऊतिम्) - रक्षण को (हूमहे) - हम प्रार्थित करते हैं । आपके द्वारा किये जानेवाले रक्षण की हम याचना करते हैं  , वह रक्षण ही हमें हजारों धनों का प्राप्त करानेवाला होगा । 
Connotation: - भावार्थ - प्रभु वृषन्तम हैं  , अध्यात्म - संग्रामों में प्रभु ही हमें विजयी बनाता है । प्रभु का रक्षण हमें प्राप्त हुआ तो धनों की हमें कोई कमी न रह जाएगी । 

SWAMI DAYANAND SARSWATI

मनुष्याः पुनस्तं कथंभूतं जानीयुरित्युपदिश्यते।

Anvay:

हे इन्द्र ! वयं वाजेषु हवनश्रुतं वृषन्तमं त्वां विद्मा हि यतो वृषन्तमस्य तव सहस्रसातमामूतिं हूमहे॥१०॥

Word-Meaning: - (विद्म) विजानीमः। द्व्यचोऽतस्तिङ इति दीर्घः। (हि) एवार्थे (त्वा) त्वाम् (वृषन्तमम्) सर्वानभीष्टान्कामान् वर्षतीति वृषा सोऽतिशयितस्तम्। कनिन्युवृषि० (उणा०१.१५४) अनेन ‘वृष’ धातोः कनिन्प्रत्ययः। अयस्मयादीनि छन्दसि। (अष्टा०१.४.२०) अनेन भसंज्ञया नलोपाभावः। उभयसंज्ञान्यपि छन्दांसि दृश्यन्त इति पदसंज्ञाश्रयणाट्टिलोपाभावः। (वाजेषु) संग्रामेषु। वाज इति संग्रामनामसु पठितम्। (निघं०२.१७) (हवनश्रुतम्) हवनमाह्वानं शृणोतीति तम् (वृषन्तमस्य) अतिशयेनोत्तमानां कामानामभिवर्षयितुस्तव (हूमहे) स्पर्धयामहे। अत्र ‘ह्वेञ्’ इत्यस्माल्लटि बहुलं छन्दसीति शपो लुक्। बहुलं छन्दसि। (अष्टा०६.१.३४) इति सम्प्रसारणम्, सम्प्रसारणाच्चेति पूर्वरूपं च। हलः। (अष्टा०६.४.२) इति दीर्घत्वम्। (ऊतिम्) रक्षां प्राप्तिमवगमं च (सहस्रसातमाम्) सहस्राणि बहूनि धनानि सुखानि वा सनोति यया साऽतिशयिता ताम्। अत्र सहस्रोपपदात् ‘षणु दाने’ इत्यस्माद्धातोः जनसन० इत्यनेन विट्। विड्वनोरनुनासिकस्यादिति नकारस्याकारादेशः। कृतो बहुलमिति करणे च॥१०॥
Connotation: - मनुष्याः सर्वकामसिद्धिप्रदं शत्रूणां युद्धेषु विजयहेतुं परमेश्वरमेव जानीयुः। येनास्मिन् जगति सर्वप्राणिसुखायासंख्याताः पदार्था उत्पाद्य रक्ष्यन्ते तं तदाज्ञां चाश्रित्य सर्वथा प्रयत्नेन स्वस्य सर्वेषां च सुखं संसाध्यम्॥१०॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord of love and power, we know you as the most generous giver of the showers of blessings, instant listener to our call in the battles of life. We pray for the divine protection of the most generous guardian and giver of victory, best and highest of a thousand other modes of protection and redemption.

ACHARYA DHARMA DEVA VIDYA MARTANDA

How should men know Him is taught in the next Mantra.

Anvay:

We know Thee, the liberal Rainer of blessings, the Hearer of our call in battles. We ask for the thousandfold Profitable Protection, attainment and knowledge of Thee, the Showerer of bounties.

Word-Meaning: - (वृषन्तमम् ) सर्वान अभीष्टान् कामान् वर्षतीति वृषा सोऽतिशयितः = The best Showerer of all desires. (ऊतिम्) रक्षां, प्राप्तिमवगमंच |= Protection, attainment and knowledge.
Connotation: - Men should know that God alone is the accomplisher of all our noble desires and giver of victory to us in battles. Taking shelter in God who protects all objects having created them and obeying His commands, with all labor, they should obtain their own happiness and that of others.

MATA SAVITA JOSHI

N/A

Word-Meaning: - N/A
Connotation: - माणसांना सर्व कामांत सिद्धिप्रद व युद्धात शत्रूंवर विजय प्राप्तीचा हेतू परमेश्वरच आहे. ज्याने या जगात सर्व प्राण्यांच्या सुखासाठी असंख्य पदार्थ उत्पन्न केलेले आहेत व त्यांचे रक्षण केलेले आहे, त्या परमेश्वराच्या आज्ञेप्रमाणे सर्व उपाय करून आपले व सर्व माणसांचे सर्वप्रकारे सुख सिद्ध केले पाहिजे. ॥ १० ॥