Go To Mantra
Viewed 73 times

उ॒दरा॑त्ते क्लो॒म्नो नाभ्या॒ हृद॑या॒दधि॑। यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत् ॥

Mantra Audio
Pad Path

उदरात् । ते । क्लोम्न: । नाभ्या: । हृदयात् । अधि । यक्ष्माणम् । सर्वेषाम् । विषम् । नि: । अवोचम् । अहम् । त्वत् ॥१३.१२॥

Atharvaveda » Kand:9» Sukta:8» Paryayah:0» Mantra:12


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

समस्त शरीर के रोग नाश का उपदेश। इस सूक्त का मिलान अ० का० २ सूक्त ३३ से करो।

Word-Meaning: - (ते) तेरे (उदरात्) उदर से, (क्लोम्नः) फेफड़े से, (नाभ्याः) नाभी से और (हृदयात् अधि) हृदय से भी, (सर्वेषाम्) सब (यक्ष्माणाम्) क्षयरोगों के (विषम्) विष को (त्वत्) तुझ से (अहम्) मैंने (निः) निकालकर (अवोचम्) बता दिया है ॥१२॥
Connotation: - जैसे उत्तम वैद्य निदान पूर्व बाहिरी और भीतरी रोगों का नाश करके मनुष्यों को हृष्ट-पुष्ट बनाता है, वैसे ही विद्वान् लोग विचारपूर्वक अविद्या को मिटा कर आनन्दित होते हैं ॥१॥ यही भावार्थ २ से २२ तक अगले मन्त्रों में जानो ॥
Footnote: १२−(क्लोम्नः) अ० २।३३।३। फुप्फुसात्। पिपासास्थानात् (अधि) अपि। अन्यत् सुगमम् ॥