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रक्षां॑सि॒ लोहि॑तमितरज॒ना ऊब॑ध्यम् ॥

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रक्षांसि । लोहितम् । इतरऽजना: । ऊबध्यम् ॥१२.१७॥

Atharvaveda » Kand:9» Sukta:7» Paryayah:0» Mantra:17


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

सृष्टि की धारणविद्या का उपदेश।

Word-Meaning: - (रक्षांसि) राक्षस [दुष्ट जीव] (लोहितम्) रुधिर रोग, (इतरजनाः) पामर लोग (ऊबध्यम्) कुपचे अन्न [के समान हैं] ॥१७॥
Connotation: - मन्त्र १४ के समान है ॥१७॥
Footnote: १७−(रक्षांसि) दुष्टजीवाः (लोहितम्) अ० ६।१२७।१। रुधिरविकारः (इतरजनाः) अ० ८।१०(५)।९। पामराः (ऊबध्यम्) अ० ९।४।१६। अजीर्णमन्नम् ॥