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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
अतिथि के सत्कार का उपदेश।
Word-Meaning: - (सः) वह [अतिथि जब] (उपहूतः) बुलाया गया (पृथिव्याम्) पृथिवी पर [वर्तमान अन्न आदि] (भक्षयति) भोगता है, (तस्मिन्) उस [अतिथि] के [भोग करने के] उपरान्त (उपहूतः) बुलाया गया वह [गृहस्थ] (पृथिव्याम्) पृथिवी पर (यत्) जो कुछ (विश्वरूपम्) विविध रूप [वस्तु है, उसे भोगता है] ॥७॥
Connotation: - अतिथि के सत्कार, सत्सङ्ग, उपदेश और आशीर्वाद से गृहस्थ पृथिवी के सब उत्तम गुणों के ज्ञान से लाभ उठाता है ॥७॥
Footnote: ७−(सः) अतिथिः (उपहूतः) कृतावाहनः (पृथिव्याम्) भूमौ वर्तमानं पदार्थजातम् (भक्षयति) भोगयति। परीक्षणेन निश्चिनोति (उपहूतः) कृतावाहनो गृहस्थः (तस्मिन्) अतिथावशितवति (यत्) यत् किंचित् (पृथिव्याम्) (विश्वरूपम्) विविधं द्रव्यम्-तद् भक्षयति, इति शेषः ॥
