Go To Mantra

स य ए॒वं वि॒द्वान्मधू॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति।

Mantra Audio
Pad Path

स: । य: । एवम् । विद्वान् । मधु । उपऽसिच्य । उपऽहरति ॥९.५॥

Atharvaveda » Kand:9» Sukta:6» Paryayah:4» Mantra:5


Reads 44 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथि के सत्कार का उपदेश।

Word-Meaning: - (यः) जो [गृहस्थ] (एवम्) ऐसा (विद्वान्) विद्वान् है, (सः) वह (मधु) मधु [मक्षिका रस] (उपसिच्य) सिद्ध करके (उपहरति) भेंट करता है। (यावत्) जितना [फल] (सुसमृद्धेन) बड़ी सम्पत्तिवाले (सत्त्रसद्येन) सत्र सद्य से [सोमयाग विशेष से] (इष्ट्वा) यज्ञ करके.... म० १, २ ॥५, ६॥
Connotation: - ऊपर के समान है-म० १, २ ॥५, ६॥
Footnote: ५, ६−(मधु) क्षौद्रम् (सत्त्रसद्येन) गुधृवीपचि०। उ० ४।१६७। षद्लृ विशरणगत्यवसादनेषु−त्र प्रत्ययः, यद्वा सत्र विस्तारे-घञ्+षद्लृ−क्विप्। तदर्हति। पा० ५०।१।६३। इति यत्। सत्रसदां सभ्यानां योग्येन सोमयागविशेषेण। अन्यत् पूर्ववत् ॥