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उप॑ हरति ह॒वींष्या सा॑दयति ॥

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उप । हरति । हवींषि । आ । सादयति ॥७.३॥

Atharvaveda » Kand:9» Sukta:6» Paryayah:2» Mantra:3


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथि के सत्कार का उपदेश।

Word-Meaning: - वह [गृहस्थ] (हवींषि) हवनद्रव्यों को (उप हरति) भेंट करता है और (आ सादयति) समीप लाता है ॥३॥
Connotation: - गृहस्थ हवनद्रव्यों को लाकर संन्यासी से हवन का लाभ पूँछता है ॥३॥
Footnote: ३−(उप हरति) समर्पयति (हवींषि) हवनद्रव्याणि (आ सादयति) समीपं प्रापयति ॥