जीवात्मा और परमात्मा के लक्षणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (सलिलस्य) समुद्र की (पृष्ठे) पीठ पर (सन्तम्) वर्तमान, (विधुम्) काम करनेवाले, (दद्राणम्) टेढ़े चलनेवाले (युवानम्) बलवान् पुरुष को (पलितः) पालनकर्ता [परमेश्वर] (जगार) निगल गया। (देवस्य) दिव्यगुणवाले [परमेश्वर] की (काव्यम्) चतुराई को (महित्वा) महत्त्व के साथ (पश्य) देख, (सः) वह [प्राणी] (अद्य) आज (ममार) मर गया [जो] (ह्यः) कल (सम् आन) जी रहा था ॥९॥
Connotation: - संसार सागर में दुराचारी बलवान् पुरुष को जगत्पालक परमेश्वर इस प्रकार नष्ट कर देता है, जैसे समुद्र में बुदबुदा, सो परमात्मा की न्यायकारिता और अपने शरीर की अनित्यता विचार कर मनुष्य धर्म में सदा प्रवृत्त रहे ॥९॥ यह मन्त्र ऋग्वेद में है−१०।५५।५। साम० पू० प्र० ४ द० ४ म० ३। तथा उ० प्र० ९।१।७। और निरुक्त १४।१८। (सलिलस्य पृष्ठे) के स्थान पर सब में [समने बहूनाम्] है ॥