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सं मा॑ग्ने॒ वर्च॑सा सृज॒ सं प्र॒जया॒ समायु॑षा। वि॒द्युर्मे॑ अ॒स्य दे॒वा इन्द्रो॑ विद्यात्स॒ह ऋषि॑भिः ॥

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Pad Path

सम् । मा । अग्ने । वर्चसा । सृज । सम् । प्रऽजया । सम् । आयुषा । विद्यु: । मे । अस्य । देवा: । इन्द्र: । विद्यात् । सह । ऋषिऽभि: ॥१.१५॥

Atharvaveda » Kand:9» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:15


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

ब्रह्म की प्राप्ति का उपदेश।

Word-Meaning: - (अग्ने) हे विद्वान् ! (मा) मुझको (वर्चसा) [ब्रह्मविद्या के] प्रकाश से (सम्) अच्छे प्रकार (प्रजया) प्रजा से (सम्) अच्छे प्रकार और (आयुषा) जीवन से (सं सृज) अच्छे प्रकार संयुक्त कर। (देवाः) विद्वान् लोग (अस्य) इस (मे) मुझको (विद्युः) जानें, (इन्द्रः) ऐश्वर्यवान् आचार्य (ऋषिभिः सह) ऋषियों के साथ [मुझे] (विद्यात्) जाने ॥१५॥
Connotation: - मनुष्य उत्तम विद्या पाकर संसार के सुधार से अपना जीवन सफल करके विद्वानों और गुरु जनों में प्रतिष्ठा पावें ॥१५॥ यह मन्त्र ऋग्वेद में है−१।२™३।२४। और पहिले आ चुका है-अ० ७।८९।२ ॥
Footnote: १५-अयं मन्त्रो व्याख्यातः-अ० ७।८९।२ ॥