Word-Meaning: - (अष्ट) आठ [महत्तत्त्व, अहंकार, पृथिवी, जल, तेज, वायु, आकाश और मन से सम्बन्धवाले] (जाता) उत्पन्न (भूता) जीव (प्रथमजा) आदिकारण [प्रकृति] से प्रकट हैं, (ये) जो (अष्ट) आठ [चार दिशा और चार विदिशा में स्थित], (इन्द्र) हे जीव ! (ऋतस्य) सत्य नियम के (ऋत्विजः) सब ऋतुओं में देनेवाले (दैव्याः) दिव्य गुणवाले [पदार्थ हैं]। (अष्टयोनिः) [यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि, इन] आठ से संयोगवाली, (अष्टपुत्रा) [अणिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, महिमा, ईशित्व, वशित्व और कामावसायिता, इन आठ ऐश्वर्यरूप] आठ पुत्रवाली (अदितिः) अखण्ड [विराट् ईश्वरशक्ति] (अष्टमीम्) व्याप्त [जगत्] को नापनेवाली (रात्रिम् अभि) रात्रि [विश्राम देनेवाली मुक्ति] में (हव्यम्) स्वीकारयोग्य [सुख] [मनुष्य को] (एति) पहुँचाती हैं ॥२१॥
Connotation: - संसार के बीच पुरुषार्थी योगी जन परमात्मा की ईश्वरता में स्थिरचित्त होकर ऐश्वर्य प्राप्त करते हैं ॥२१॥