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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
रोग के विनाश का उपदेश।
Word-Meaning: - (वराहः) सूअर (वीरुधम्) ओषधि (वेद) जानता है, (नकुलः) नेवला (भेषजीम्) रोग जीतनेवाली वस्तु (वेद) जानता है। (सर्पाः) सर्प और (गन्धर्वाः) गन्धर्व [दुःखदायी पीड़ा देनेवाले जीव] (याः) जिनको (विदुः) जानते हैं, (ताः) उनको (अस्मै) इस [पुरुष] के लिये (अवसे) रक्षा के हित (हुवे) मैं बुलाता हूँ ॥२३॥
Connotation: - मनुष्यों को योग्य है कि जिन ओषधियों को अन्य प्राणी काम में लाते हैं, उनकी यथावत् परीक्षा करके प्रयोग करें ॥२३॥
Footnote: २३−(वराहः) अन्येष्वपि दृश्यते। पा० ३।२।१०१। वर+आङ्+हन् वा हृञ् हरणे-ड। वराय अभीष्टाय मुस्तादिलाभाय आहन्ति खनति भूमिम्, वा वरान्, आहरतीति। वराहो मेघो भवति वराहारः,... अयमपीतरो वराह एतस्मादेव, बृहति मूलानि, वरंवरं मूलं बृहतीति वा.... अङ्गिरसोऽपि वराहा उच्यन्ते-निरु० ५।४। शूकरः (वेद) जानाति (वीरुधम्) ओषधिम् (नकुलः) अ० ६।१३९।५। जन्तुविशेषः (भेषजीम्) भयनिवारिकां चिकित्साम् (सर्पाः) (गन्धर्वाः) अ० ८।६।१९। दुःखदायिनश्च ते पीडकाश्च ते (याः) ओषधीः (विदुः) जानन्ति (ताः) (अस्मै) पुरुषाय (अवसे) रक्षणाय (हुवे) आह्वयामि ॥
