Reads 59 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
गर्भ की रक्षा का उपदेश।
Word-Meaning: - (यः) जो [रोग] (इमाम्) इस (स्त्रियम्) स्त्री को (मृतवत्साम्) मरे बच्चेवाली और (अवतोकाम्) पतितगर्भवाली (कृणोति) करता है। (ओषधे) हे ओषधि ! [अन्न आदि पदार्थ] (त्वम्) तू (अस्याः) इस [स्त्री] के (तम्) उस (कमलम्) कामना रोकनेवाले और (अञ्जिवम्) कान्ति [शोभा] हरनेवाले [रोग] को (नाशय) नाश कर ॥९॥
Connotation: - मनुष्य प्रयत्न करें कि स्त्री उत्तम अन्न ओषधि आदि के सेवन से नीरोग रहकर बालक की पालना और फिर भी गर्भ की रक्षा करके कामना पूरी करती हुई शोभा बढ़ावें ॥९॥
Footnote: ९−(यः) रोगः (कृणोति) करोति (मृतवत्साम्) मृतबालकाम् (अवतोकाम्) अवपन्नगर्भाम् (इमाम्) गर्भिणीम् (स्त्रियम्) (तम्) रोगम् (ओषधे) अ० १।३०।३। अन्नादिपदार्थ (त्वम्) (नाशय) निवारय (अस्याः) गर्भिण्याः (कमलम्) अन्येभ्योऽपि दृश्यन्ते। पा० ३।२।७५। कमु कान्तौ-विच्+अल वारणे-अच्। कामनावारकम् (अञ्जिवम्) सर्वधातुभ्य इन्। उ० ४।११८। अञ्ज व्यक्तिम्रक्षणकान्तिगतिषु-इन्। आतोऽनुपसर्गे कः। पा० ३।२।३। अञ्जि+वा गतिगन्धनयोः-क। कान्तिनाशकम्। शोभाहर्तारम् ॥
