Devata: कृत्यादूषणम् अथवा मन्त्रोक्ताः
Rishi: शुक्रः
Chhanda: विराड्गर्भास्तारपङ्क्तिः
Swara: प्रतिसरमणि सूक्त
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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
हिंसा के नाश का उपदेश।
Word-Meaning: - (देवमणिः) दिव्य मणि [श्रेष्ठ नियम] (मह्यै) बड़ी (अरिष्टतातये) कुशलता के लिये (मा) मुझ पर (आ अरुक्षत्) आरूढ़ [अधिकारवान्] हुआ है। [हे विद्वानो !] (इमम्) इस (तनूपानम्) शरीरपालक, (त्रिवरूथम्) तीन [आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक] रक्षावाले (मेथिम्) ज्ञान में (ओजसे) बल के लिये (अभिसंविशध्वम्) सब ओर से मिलकर प्रवेश करो ॥२०॥
Connotation: - सर्वशक्तिमान् परमेश्वर ने प्रत्येक प्राणी के कुशल के लिये उत्तम नियम उत्पन्न किये हैं, सब विद्वान् लोग उनका आश्रय लेकर अपना बल बढ़ावें ॥२०॥ इस मन्त्र का पूर्वभाग कुछ भेद से आ चुका है-अ० ३।५।५ ॥
Footnote: २०−(मा) माम् (आ अरुक्षत्) अ० ३।५।५। आरूढवान्। अधिष्ठितवान्, (देवमणिः) दिव्यगुणो मणिः श्रेष्ठनियमः (मह्यै) महत्यै (अरिष्टतातये) अ० ३।५।५। कुशलकरणाय (इमम्) सुप्रसिद्धम् (मेथिम्) सर्वधातुभ्य इन्। उ० ४।११८। मेथृ वधे मेधायां च-इन्। बोधम् (अभिसंविशध्वम्) सर्वतो मिलित्वा प्रविशत, आश्रयध्वम् (तनूपानम्) शरीरपालकम् (त्रिरूथम्) जॄवृञ्भ्यामूथन्। उ० २।६। वृञ् स्वीकरणे संवरणे वा-ऊथन्। त्रीणि वरूथानि आध्यात्मिकाधिभौतिकाधिदैविकानि रक्षणानि यस्मिंस्तम् (ओजसे) बलाय ॥
