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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
कल्याण की प्राप्ति का उपदेश।
Word-Meaning: - [हे मनुष्य !] (ते) तेरे लिये (व्रीहियवौ) चावल और जौ (शिवौ) मङ्गल करनेवाले, (अबलासौ) बल के न गिरानेवाले और (अदोमधौ) भोजन में हर्ष करनेवाले (स्ताम्) हों। (एतौ) यह दोनों (यक्ष्मम्) राजरोग को (वि) विशेष करके (बाधेते) हटाते हैं, (एतौ) यह दोनों (अंहसः) कष्ट से (मुञ्चतः) छुड़ाते हैं ॥१८॥
Connotation: - मनुष्यों को चावल और जौ आदि सात्त्विक अन्न का भोजन प्रसन्न होकर करना चाहिये, जिससे वह पुष्टिकारक हो ॥१८॥
Footnote: १८−(शिवौ) सुखकरौ (ते) तुभ्यम् (स्ताम्) (व्रीहियवौ) अन्नविशेषौ (अबलासौ) अ० ६।६३।१। अ+बल+अनु क्षेपणे-क्विप्। शरीरबलस्य अक्षेप्तारौ (अदोमधौ) अद भक्षणे-असुन्+मद हर्षे-अच्, दस्य धः। भोजने हर्षकरौ (एनौ) व्रीहियवौ (यक्ष्मम्) राजरोगम् (वि) विशेषेण (बाधेते) अपनयतः (एतौ) (मुञ्चतः) मोचयतः (अंहसः) कष्टात् ॥
