Reads 45 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
Word-Meaning: - (सर्पाः) सर्प (तद् विषम्) उस विष का (उप जीवन्ति) आश्रय लेकर जीते हैं, वह पुरुष (उपजीवनीयः) [दूसरों का] आश्रय (भवति) होता है, (यः एवम् वेद) जो ऐसा जानता है ॥१६॥
Connotation: - दुष्टों की दुष्टता जाननेवाला पुरुष शिष्टों का आश्रयणीय होता है ॥१६॥
Footnote: १६−(सर्पाः) भुजङ्गाः। अन्यत् पूर्ववत् ॥
