Reads 43 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
ब्रह्मविद्या का उपदेश।
Word-Meaning: - “(ऊर्जे) हे बलवती ! (आ इहि) तू आ, (स्वधे) हे धन रखनेवाली ! (आ इहि) तू आ, (सूनृते) हे प्रिय सत्य वाणीवाली ! (आ इहि) तू आ, (इरावति) हे अन्नवाली ! (आ इहि) तू आ, (इति) बस ॥४॥
Connotation: - सब लोक-लोकान्तर और प्राणी विराट् नाम ईश्वरशक्ति का आश्रय लेकर जीवनधारण करते हैं ॥४॥
Footnote: ४−(ऊर्जे) ऊर्ज्-अर्शआद्यच्, टाप्। हे बलवति (एहि) आगच्छ (स्वधे) स्वं धनं दधातीति स्वधा, हे धनधारिके (सूनृते) अ० ३।१२।२। सूनृत-अच्। सत्यप्रियवाग्युक्ते (इरावति) इरा, अन्नम्-निघ० २।७। हे अन्नवति (इति) समाप्तौ ॥
