मनुष्य के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (गोधुक्) हे विद्या के दोहनेवाले विद्वान् ! (पयसा) विज्ञान से (ओषम्) अन्धकारदाहक व्यवहार को (घर्मे) प्रकाशमान यज्ञ के बीच (उप) आदर से (द्रव) प्राप्त हो, और (आ) सब ओर से (सिञ्च) सींच [जैसे] (उस्रियायाः) गौ के (पयः) दूध को। (वरेण्यः) श्रेष्ठ (सविता) सबके चलानेवाले परमेश्वर ने (नाकम्) मोक्ष सुख का (वि अख्यत्) व्याख्यान किया है, वही (उषसः) अन्धकारनाशक उषा के (अनुप्रयाणम्) निरन्तर गमन का (वि) विशेष करके (राजति) राजा होता है ॥६॥
Connotation: - मनुष्य गौ के दूध के समान तत्त्वज्ञान को प्राप्त करके सत्कर्मों में प्रकाश करे। जैसे सूर्य का प्रकाश लगातार सब देशों पर चला आता है, उसी प्रकार परमात्मा ने सबके लिये मोक्ष का उपदेश वेद द्वारा किया है ॥६॥