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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
शत्रु के दमन का उपदेश।
Word-Meaning: - (अजिराधिराजौ) शीघ्रगामी दोनों बड़े राजा [दरिद्रता] और मृत्यु-म० १ (सम्पातिनौ) झपट मारनेवाले (श्येनौ इव) दो श्येन वा वाज पक्षी के समान (पृतन्यतः) उस चढ़ाई करनेवाले शत्रु को (आज्यम्) घृत [तत्त्वपदार्थ] को (हताम्) नाश करें (यः कः च) जो कोई (नः) हम से (अभ्यघायति) दुष्ट आचरण करें ॥३॥
Connotation: - दुःखदायी शत्रुओं के नाश करने में राजा शीघ्रता करें ॥३॥
Footnote: ३−(अजिराधिराजौ) अजिरशिशिरशिथिल०। उ० १।५३। अज गतिक्षेपणयोः-किरच्। अजिरः शीघ्रगामी। अधिराजः। राजाहःसखिभ्यष्टच् पा० ५।४।९१। इति टच्। अधिको राजा। तौ निर्ऋतिमृत्यू (श्येनौ) अ० ३।३।३। पक्षिविशेषौ (सम्पातिनौ) निष्पतनशीलौ (इव) यथा (आज्यम्) घृतम्। तत्त्वपदार्थम् (पृतन्यतः) अ० १।२१।२। सङ्ग्रामेच्छोः (हताम्) नाशयताम् (यः) (नः) अस्मान् (कः च) कश्चित् (अभ्यघायति) अ० ५।६।९। पापं कर्तुमिच्छति ॥
