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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
शत्रुओं से रक्षा का उपदेश।
Word-Meaning: - (कृष्णः) कौवे वा (शकुनिः) चिल्ल के समान निन्दित उपद्रव ने (अभिनिष्पतन्) सन्मुख आते हुए (इदम् यत्) यह जो कष्ट (अपीपतत्) गिराया है। (आपः) उत्तम कर्म (मा) मुझको (तस्मात्) उस (सर्वस्मात्) सब (दुरितात्) कठिन (अंहसः) कष्ट से (पान्तु) बचावें ॥१॥
Connotation: - मनुष्य प्रयत्न करके सब बाहिरी और भीतरी विपत्तियों से बचें ॥१॥
Footnote: १−(इदम्) (यत्) कष्टम् (कृष्णः) श्वाकाक इति कुत्सायाम्-निरु० ३।१८। काक इव निन्दित उपद्रवः। शकेरुनोन्तोन्त्युनयः। उ० ३।४९। शक्लृ शक्तौ-उनि। चिल्ल इव निन्दितः (अभिनिष्पतन्) अभिमुखमागच्छन् (अपीपतत्) पत्लृ अधःपतने-णिचि लुङि रूपम्। पातितवान्। प्रापितवान् (आपः) अ० ६।९१।३। उत्तमानि कर्माणि (मा) माम् (तस्मात्) (सर्वस्मात्) (दुरितात्) दुर्गतात्। कठिनात् (पान्तु) रक्षन्तु (अंहसः) कष्टात् ॥
