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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
कुवचन के त्याग का उपदेश।
Word-Meaning: - (इमे) यह (गृहाः) घर के लोग (मयोभुवः) आनन्द देनेवाले, (ऊर्जस्वन्तः) बड़े पराक्रमी, (पयस्वन्तः) उत्तम जल, दुग्ध आदिवाले, (वामेन) उत्तम धन से (पूर्णाः) भरपूर (तिष्ठन्तः) खड़े हुए हैं। (ते) वे लोग (आयतः) आते हुए (नः) हमको (जानन्तु) जानें ॥२॥
Connotation: - घर के लोग बाहिर से आये हुए गृहस्थों और अतिथियों का यथावत् सत्कार करें ॥२॥
Footnote: २−(इमे) (गृहाः) गृहस्थाः (मयोभुवः) अ० १।५।१। सुखस्य भावयितारः (ऊर्जस्वन्तः) अ० ३।१२।२। प्रभूतपराक्रमिणः (पयस्वन्तः) उत्तमजलदुग्धादिसमृद्धाः (पूर्णाः) समृद्धाः (वामेन) प्रशस्येन धनेन। वामः प्रशस्यः-निघ० ३।८। (तिष्ठन्तः) (ते) गृहाः (जानन्तु) अवबुध्यन्ताम् (आयतः) इण् गतौ-शतृ। आगच्छतः ॥
