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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
विष नाश का उपदेश।
Word-Meaning: - [हे मनुष्य !] (यतः) जहाँ पर (दष्टम्) काटा गया है और (यतः) जहाँ पर (धीतम्) [रुधिर] पिया गया है, (ते) तेरे (ततः) उसी [अङ्ग] से (अर्भस्य) छोटे (तृप्रदंशिनः) तीव्र काटनेवाले (मशकस्य) मच्छर के (अरसम्) निर्बल [किये हुए] (विषम्) विष को (निः) निकालकर (ह्वयामसि) हम वचन देते हैं ॥३॥
Connotation: - मनुष्य सुपरीक्षित ओषधियों से प्रयत्नपूर्वक विष आदि रोग नाश करें ॥३॥
Footnote: ३−(यतः) सप्तम्यर्थे तसिः। यस्मिन् देशे (दष्टम्) हिंसितम् (यतः) यस्मिन्नङ्गे (धीतम्) धेट् पाने-क्त। रुधिरं पीतम् (ततः) तस्मादङ्गात् (ते) तव (निः) निःसार्य (ह्वयामसि) कथयामः (अर्भस्य) अल्पस्य (तृप्रदंशिनः) तृप संदीपने प्रीणने च-रक्+दंश दंशने-णिनि। तीव्रदंशनशीलस्य (मशकस्य) मश ध्वनौ कोपे च−वुन्। कीटभेदस्य (अरसम्) निर्बलं कृतम् (विषम्) ॥
