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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मनुष्यों के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (अक्षाः) हे व्यवहारकुशल पुरुषो ! (क्षीरिणीम्) बड़ी दुधेल (गाम् इव) गौ के समान (फलवतीम्) उत्तम फलवाली (द्युवम्) व्यवहार शक्ति (दत्त) दान करो। (कृतस्य) कर्म की (धारया) धारा [प्रवाह] से (मा) मुझको (सम् नह्यत) यथावत् बाँधो (इव) जैसे (स्नाव्ना) डोरी से (धनुः) धनुष को [बाँधते हैं] ॥९॥
Connotation: - मनुष्य विद्वानों से अनेक विद्यायें प्राप्त करके अपना जीवन सुफल करें ॥९॥
Footnote: ९−(अक्षाः) अक्ष-अर्शआद्यच्। व्यवहारकुशलाः (फलवतीम्) उत्तमफलयुक्ताम् (द्युवम्) दीव्यतेर्भावे-क्विप्। च्छ्वोः शूडनुनासिके च। पा० ६।४।१९। इत्यूठ्, अमि उवङादेशः। व्यवहारशक्तिम् (दत्त) प्रयच्छत (गाम्) धेनुम् (क्षीरिणीम्) बहुदोग्ध्रीम् (इव) यथा (मा) माम् (कृतस्य) विहितस्य कर्मणः (धारया) प्रवाहेण (धनुः) चापम् (स्नाव्ना) स्नामदिपद्यर्ति० उ० ४।११३। स्ना शौचे-वनिप्। वायुवाहिन्या नाड्या। स्नायुनिर्मितया मौर्व्या (इव) यथा (सम् नह्यत) संयोजयत ॥
