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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मनुष्यों के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (यथा) जैसे (अशनिः) बिजुली (विश्वाहा) सब दिनों (अप्रति) बे रोक होकर (वृक्षम्) पेड़ को (हन्ति) गिरा देती है, (एव) वैसे ही (अहम्) मैं (अद्य) आज (अप्रति) बे रोक होकर (अक्षैः) पाशों से (कितवान्) ज्ञान नाश करनेवाले, जुआ खेलनेवालों को (बध्यासम्) नाश करूँ ॥१॥
Connotation: - मनुष्यों को योग्य है कि जुआरी, लुटेरे आदिकों को तुरन्त दण्ड देकर नाश करें ॥१॥
Footnote: १−(यथा) येन प्रकारेण (वृक्षम्) तरुम् (अशनिः) विद्युत् (विश्वाहा) सर्वाणि दिनानि (हन्ति) नाशयति (अप्रति) अप्रतिपक्षम् (एव) एवम् (अहम्) शूरः (अद्य) (कितवान्) कि ज्ञाने-क्त+वा गतिगन्धनयोः-क। कितवः किं तवास्तीति शब्दानुकृतिः कृतवान् वाशीर्नामकः-निरु० ५।२२। ज्ञाननाशकान्। वञ्चकान्। द्यूतकारकान् (अक्षैः) द्यूतसाधनैः पाशकादिभिः (बध्यासम्) हन्तेर्लिङि। नाशयेयम् ॥
