Go To Mantra
Viewed 120 times

यथे॒मे द्यावा॑पृथि॒वी स॒द्यः प॒र्येति॒ सूर्यः॑। ए॒वा पर्ये॑मि ते॒ मनो॒ यथा॒ मां का॒मिन्यसो॒ यथा॒ मन्नाप॑गा॒ असः॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

यथा । इमे इति । द्यावापृथिवी इति । सद्य: । परिऽएति । सूर्य: । एव । परि । एमि । ते । मन: । यथा । माम् । कामिनी । अस: । यथा । मत् । न । अपऽगा: ।अस:॥८.३॥

Atharvaveda » Kand:6» Sukta:8» Paryayah:0» Mantra:3


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

विद्या की प्राप्ति का उपदेश।

Word-Meaning: - (यथा) जैसे (इमे) इस (द्यावापृथिवी) आकाश और भूमि में (सूर्यः) लोकों का चलानेवाला सूर्य (सद्यः) शीघ्र (पर्येति) व्याप जाता है। (एव) वैसे ही (ते) तेरे लिये (मनः) अपना मन (परि एमि) मैं व्यापक करता हूँ, (यथा) जिस से तू (माम् कामिनी) मेरी कामना करनेवाली (असः) होवे, और (यथा) जिस से तू (मत्) मुझ से (अपगाः) बिछुरनेवाली (न) न (असः) होवे ॥३॥
Connotation: - जो मनुष्य सूर्य के समान नियम से परिश्रम करके विद्या प्राप्त करते हैं, वे परोपकारी होकर सुखी रहते हैं ॥३॥
Footnote: ३−(यथा) (इमे) परिदृश्यमाने (द्यावापृथिवी) आकाशं भूमिं च (परि एति) परितो व्याप्नोति (सूर्यः) लोकप्रेरको भास्करः (एव) एवम् (परि एमि) परितः प्राप्नोमि। अन्यत् पूर्ववत् ॥