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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
धन और जीवन की वृद्धि का उपदेश।
Word-Meaning: - (इन्द्र) हे परम ऐश्वर्यवाले जगदीश्वर ! (इमम्) इस पुरुष को (प्रतरम्) अधिक ऊँचा (कृधि) कर, यह (सजातानाम्) समान जन्मवाले बन्धुओं का (वशी) वश में रखनेवाला, अधिष्ठाता (असत्) होवे। (रायः) धन की (पोषेण) पुष्टि से (सम् सृज) संयुक्त कर और (जीवातवे) बड़े जीवन के लिये और (जरसे) स्तुति के लिये (नय) आगे बढ़ा ॥२॥
Connotation: - मनुष्य परमेश्वर की आज्ञा पालन करके अपने बन्धुओं को उत्तम बर्ताव से वश में रख कर धन की वृद्धि करके पूर्ण यश प्राप्त करें ॥२॥
Footnote: २−(इन्द्र) हे परमैश्वर्यवन् भगवन् (इमम्) धर्मात्मानम् (प्रतरम्) अधिकप्रवृद्धम् (कृधि) कुरु (सजातानाम्) समानजन्मनां बन्धूनाम् (असत्) भवेत् (वशी) वशयिता। अधिष्ठाता (रायः) धनस्य (पोषेण) वर्धनेन (सम् सृज) संयोजय (जीवातवे) जीवेरातुः। उ० १।७८। इति जीव प्राणधारणे−आतु। चिरजीवनाय (जरसे) अ० १।३०।२। स्तुतये (नय) प्रेरय ॥
