Reads 60 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
क्रोध की शान्ति के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (अयम्) यह (यः) जो (भूरिमूलः) बहुत प्रतिष्ठावाला होकर (समुद्रम्) अन्तरिक्ष लोक तक (अवतिष्ठति) फैलता है। (दर्भ) वह दर्भ सुकर्मों का गूँथनेवाला पुरुष (पृथिव्याः) पृथिवी से (उत्थितः) उठकर (मन्युशमनः) क्रोध शान्त करनेवाला (उच्यते) कहा जाता है ॥२॥
Connotation: - जो मनुष्य विवेक द्वारा प्रतिष्ठित होकर अन्तरिक्ष आदि लोक तक अधिकार जमाता है, वह संसार में यशस्वी और शान्तचित्त माना जाता है ॥२॥
Footnote: २−(अयम्) (यः) दर्भः (भूरिमूलः) मूल प्रतिष्ठायां रोपणे च−क बहुप्रतिष्ठितः सन् (समुद्रम्) अ० १।३।८। अन्तरिक्षम्−निघ० १।३। (अवतिष्ठति) व्याप्य वर्तते (दर्भः) म० १। सुकर्मणां ग्रन्थकः (पृथिव्याः) भूमेः सकाशात् (उत्थितः) उपरि स्थितः सन्। अन्यत्पूर्ववत् ॥
