Go To Mantra
Viewed 129 times

अ॒यं यो भूरि॑मूलः समु॒द्रम॑व॒तिष्ठ॑ति। द॒र्भः पृ॑थि॒व्या उत्थि॑तो मन्यु॒शम॑न उच्यते ॥

Mantra Audio
Pad Path

अयम् । य: । भूरिऽमूल: । समुद्रम् । अवऽतिष्ठति । दर्भ: । पृथिव्या: । उत्थित: । मन्युऽशमन: । उच्यते ॥४३.२॥

Atharvaveda » Kand:6» Sukta:43» Paryayah:0» Mantra:2


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

क्रोध की शान्ति के लिये उपदेश।

Word-Meaning: - (अयम्) यह (यः) जो (भूरिमूलः) बहुत प्रतिष्ठावाला होकर (समुद्रम्) अन्तरिक्ष लोक तक (अवतिष्ठति) फैलता है। (दर्भ) वह दर्भ सुकर्मों का गूँथनेवाला पुरुष (पृथिव्याः) पृथिवी से (उत्थितः) उठकर (मन्युशमनः) क्रोध शान्त करनेवाला (उच्यते) कहा जाता है ॥२॥
Connotation: - जो मनुष्य विवेक द्वारा प्रतिष्ठित होकर अन्तरिक्ष आदि लोक तक अधिकार जमाता है, वह संसार में यशस्वी और शान्तचित्त माना जाता है ॥२॥
Footnote: २−(अयम्) (यः) दर्भः (भूरिमूलः) मूल प्रतिष्ठायां रोपणे च−क बहुप्रतिष्ठितः सन् (समुद्रम्) अ० १।३।८। अन्तरिक्षम्−निघ० १।३। (अवतिष्ठति) व्याप्य वर्तते (दर्भः) म० १। सुकर्मणां ग्रन्थकः (पृथिव्याः) भूमेः सकाशात् (उत्थितः) उपरि स्थितः सन्। अन्यत्पूर्ववत् ॥