Reads 64 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
आत्मा की उन्नति का उपदेश।
Word-Meaning: - (अपानाय) बाहिर निकलनेवाले अपानवायु के लिये, (व्यानाय) शरीर में व्यापक व्यान वायु के लिये, (भूरिधायसे) अनेक प्रकार से धारण करनेवाले (प्राणाय) जीवनवायु प्राण के लिये और (उरुव्यचे) दूर-दूर तक फैलनेवाले (सरस्वत्यै) विज्ञानवती सरस्वती [विद्या] के लिये (वयम्) हम लोग (हविषा) भक्ति से [परमेश्वर को (विधेम) पूजें ॥२॥
Connotation: - मनुष्य परमेश्वर को आत्मसमर्पण करके आत्मा और शरीर से स्वस्थ रहकर अनेक प्रकार से विज्ञान प्राप्त करें ॥२॥
Footnote: २−(अपानाय) शरीराद्बहिर्गन्त्रे वायवे (व्यानाय) शरीरव्यापकाय पवनाय (प्राणाय) जीवनसाधनाय समीराय (भूरिधायसे) अ० १।२।१। बहुपोषकाय (सरस्वत्यै) विज्ञानवत्यै विद्यायै (उरुव्यचे) अ० ५।३।८। उरु+वि+अच गतौ−विच्। बहुलं व्याप्नुवत्यै। अन्यत् पूर्ववत् ॥
