Go To Mantra

यो रक्षां॑सि नि॒जूर्व॑त्य॒ग्निस्ति॒ग्मेन॑ शो॒चिषा॑। स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

य: । रक्षांसि । निऽजूर्वति । अग्नि: । तिग्मेन । शोचिषा । स:। न: । पर्षत् । अति । द्विष: ॥३४.२॥

Atharvaveda » Kand:6» Sukta:34» Paryayah:0» Mantra:2


Reads 69 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

शत्रुओं के नाश का उपदेश।

Word-Meaning: - (यः) जो (अग्निः) ज्ञानस्वरूप परमेश्वर (तिग्मेन) तीव्र (शोचिषा) तेज से (रक्षांसि) राक्षसों को (निजूर्वति) मार गिराता है। (स) वह (द्विषः) वैरियों को (अति) उलाँघ कर (नः) हमें (पर्षत्) भरपूर करे ॥२॥
Connotation: - जैसे अग्नि के प्रकाश से अन्धकार नष्ट होता है, वैसे ही मनुष्य परमेश्वर के ज्ञान से अज्ञान मिटावें ॥२॥
Footnote: २−(रक्षांसि) राक्षसान्। दारिद्र्यादिदोषान् (निजूर्वति) जुर्व वधे। निहन्ति (तिग्मेन) तीक्ष्णेन (शोचिषा) तेजसा। अन्यद् गतम् ॥