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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
रोग के नाश के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (पञ्च) पाँच (च च) और (पञ्चाशत्) पचास (याः) जो पीड़ायें (मन्याः अभि) गले की नसों में (संयन्ति) सब ओर से व्याप्त होती हैं। (ताः सर्वाः) वे सब (इतः) यहाँ से (नश्यन्तु) नष्ट हो जावें, (इव) जैसे (अपचिताम्) निर्बलों के (वाकाः) वचन [नष्ट हो जाते हैं] ॥१॥
Connotation: - जैसे सद्वैद्य गले के गण्डमाला आदि रोगों को नष्ट करता है, इसी प्रकार मनुष्य अपने दोषों का निवारण करे ॥१॥
Footnote: १−(पञ्च च पञ्चाशच्च) पञ्चाधिकपञ्चाशत्संख्यकाः (याः) पीडाः (संयन्ति) सर्वतो व्याप्नुवन्ति (मन्याः) मन धृतौ−क्यप्, टाप्। ग्रीवायाः पश्चात् शिराः (अभि) प्रति (इतः) अस्माद्देशात् (ताः) पीडाः (सर्वाः) (नश्यन्तु) अदृष्टा भवन्तु (वाकाः) वच व्यक्तायां वाचि−घञ् कुत्वम्। वचनानि (अपचिताम्) अप+चिञ् हीनकरणे−क्विप्। हीनानां निर्बलानाम् ॥
