Go To Mantra
Viewed 137 times

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ विष्ठि॑तं॒ जग॑त्। ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे ॥

Mantra Audio
Pad Path

यथा । इयम् । पृथिवी । मही । दाधार । विऽस्थितम् । जगत् । एव । ते । ध्रियताम् । गर्भ: । अनु । सूतुम् । सवितवे ॥१७.४॥

Atharvaveda » Kand:6» Sukta:17» Paryayah:0» Mantra:4


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

गर्भाधान का उपदेश।

Word-Meaning: - (यथा) जैसे (इयम्) इस (मही) बड़ी (पृथिवी) पृथिवी ने (विष्ठितम्) विविध प्रकार से स्थित (जगत्) जगत् को (दाधार) धारण किया है। (एव) वैसे ही (ते) तेरा (गर्भः) गर्भ (सूतुम्) संतान को (अनु) अनुकूलता से (सवितवे) उत्पन्न करने के लिये (ध्रियताम्) धारण किया जावे ॥४॥
Footnote: ४−(विष्ठितम्) विविधं स्थितम् (जगत्) चराचरात्मकं ससारम्। अन्यद् गतम् ॥