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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मोक्ष पाने का उपदेश।
Word-Meaning: - (भगवती=०−त्यौ) दो ऐश्वर्यवाले (विचृतौ) [अन्धकार से] छुड़ानेहारे (नाम) प्रसिद्ध (तारके) तारे [सूर्य और चन्द्रमा] (उदगाताम्) उदय हुए हैं। वे दोनों (इह) यहाँ पर (अमृतस्य) मरण से बचाव [पुरुषार्थ] का (प्रयच्छताम्) दान करें, [तब] (बद्धकमोचनम्) बँधुवे [आत्मा] की मुक्ति (प्र एतु) हो जावे ॥३॥
Connotation: - जिस प्रकार सूर्य और चन्द्रमा नियम पर चलकर जगत् का उपकार करते हैं, इसी प्रकार पुरुषार्थी मनुष्य ईश्वर आज्ञा पालन करके आप दुःख से छूटते और औरों को छुड़ाते हैं ॥३॥ इस मन्त्र का पूर्वार्द्ध पहिले आ चुका है−अ० २।८।१ ॥
Footnote: ३−(उदगाताम्) उदितेऽभूताम् (भगवती) भगवत्यौ। ऐश्वर्यवत्यौ (विचृतौ) अन्धकाराद् विमोचयित्र्यौ (नाम) प्रसिद्धे (तारके) ज्योतिषी। सूर्यचन्द्रौ (इह) अस्मिन् पुरुषे (अमृतस्य) मरणराहित्यस्य। पुरुषार्थस्य (प्रयच्छताम्)। उभे दानं कुरुताम् (प्र एतु) प्रकर्षेण गच्छतु (बद्धकमोचनम्) कुत्सायां कन्। कुत्सितबन्धं प्राप्तस्य मोक्षः। अन्यद् व्याख्यातम्−अ० २।८।१ ॥