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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सब सुख प्राप्ति का उपदेश।
Word-Meaning: - [हे ऐश्वर्य के कारण और ज्ञानदाता तुम दोनों !] (अस्मान्) हमें (दुरितात्) दुर्गति और (अवद्यात्) अकथनीय निन्दनीय कर्म से (मुमुक्तम्) छुड़ावो, (यज्ञम्) देवपूजन को (जुषेथाम्) स्वीकार करो, (अमृतम्) अमरण अर्थात् पुरुषार्थ अथवा अमरपन अर्थात् कीर्त्तिमत्ता (अस्मासु) हम में (धत्तम्) धारण करो ॥८॥
Connotation: - राजा और वैद्य के सुकर्मों से सब लोग आत्मिक और शारीरिक रोग छोड़कर धर्म में प्रवृत्त होकर अमर अर्थात् पुरुषार्थी और यशस्वी होवें ॥८॥
Footnote: ८−(मुमुक्तम्) मोचयतम्। हे सोमारुद्रौ युवाम् (अस्मान्) धार्मिकान् (दुरितात्) अ० २।१०।६। दुर्गतेः (अवद्यात्) अ० २।१०।६। अकथनीयात्। गर्ह्यात् कर्मणः (जुषेथाम्) सेवेथाम्। स्वीकुरुतम् (यज्ञम्) देवपूजनम् (अमृतम्) अमरणं पुरुषार्थम्। अमरत्वं कीर्तिमत्त्वम् (अस्मासु) धर्मात्मसु (धत्तम्) धारयतम् ॥
