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अपै॑तेनारात्सीरसौ॒ स्वाहा॑। ति॒ग्मायु॑धौ ति॒ग्महे॑ती सु॒षेवौ॒ सोमा॑रुद्रावि॒ह सु मृ॑डतं नः ॥
Pad Path
अप । एतेन ।अरात्सी: । असौ । स्वाहा । तिग्मऽआयुधौ । तिग्महेती इति तिग्मऽहेती । सुऽशेवौ । सोमारुद्रौ । इह । सु । मृडतम् । न: ॥६.७॥
Atharvaveda » Kand:5» Sukta:6» Paryayah:0» Mantra:7
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सब सुख प्राप्ति का उपदेश।
Word-Meaning: - [हे परमेश्वर !] (एतेन) अपनी व्याप्ति से (असौ) उस तूने [दुष्ट जनको] (अप अरात्सीः) अपराधी ठहराया है, (स्वाहा) यह सुन्दर वाणी वा स्तुति है। (तिग्मायुधौ) हे तेज शस्त्रोंवाले, (तिग्महेती) पैने वज्रोंवाले, (सुशेवौ) बड़े सुखवाले, (सोमारुद्रौ) ऐश्वर्य के कारण और ज्ञानदाता, अथवा चन्द्रमा और प्राण के तुल्य, राजा और वैद्य जनो, तुम दोनों (इह) यहाँ पर (सु) अच्छे प्रकार (नः) हमें (मृडतम्) सुखी करो ॥७॥
Connotation: - परमेश्वर पापियों को अपराधी ठहराकर दण्ड देता है। राजा और वैद्य धन और नीरोगता राज्य में बढ़ावें ॥७॥
Footnote: ७−(अप अरात्सीः) अपराद्धवानसि, दोषयुक्तं कल्पितवानसि दुष्टम्। अन्यत् पूर्ववत्−म० ५ ॥
