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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
आत्मा के उन्नति का उपदेश।
Word-Meaning: - (पथः) मार्ग के (उदयनम्) चढ़ाव को (विद्वान्) जानता हुआ, (अनुहूतः) प्रीति से बुलाया गया तू (पुनः) फिर (आ इहि) आ। (आरोहणम्) चढ़ना और (आक्रमणम्) आगे बढ़ना (जीवतोजीवतः) प्रत्येक जीव का (अयनम्) मार्ग है ॥७॥
Connotation: - मनुष्य उन्नति के उपायों को जानकर सदा बढ़ता रहे जैसे कि चिउंटी आदि छोटे जीव भी ऊँचे चढ़ने में लगे रहते हैं ॥७॥
Footnote: ७−(अनुहूतः) पुरुषार्थित्वात् प्रीत्या हूतः (पुनः) उत्साहं कृत्वा−इत्यर्थः (आ इहि) आगच्छ (विद्वान्) जानन् (उदयनम्) उद्गमनम् (पथः) मार्गस्य (आरोहणम्) ऊर्ध्वगमनम् (आक्रमणम्) अधिगमनन्। अतिक्रमः (जीवतोजीवतः) जीव प्राणधारणे−शतृ। सर्वस्य प्राणिनः (अयनम्) गतिः। मार्गः ॥
