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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
आत्मा के उन्नति का उपदेश।
Word-Meaning: - (यत्) यदि (मातृकृतात्) माता के किये हुए (च) और (यत्) यदि (पितृकृतात्) पिता के किये हुए (एनसः) अपराध से (शेषे) तू सोता है। (उभे) दोनों (उन्मोचनप्रमोचने) अलग रहना और छुटकारा (ते) तुझ को (वाचा) वेदवाणी से (वदामि) मैं बताता हूँ ॥४॥
Connotation: - माता पिता आदि के दोष से जो मनुष्य निरुद्यमी होता हो, तो वह उस दोष को त्याग दे ॥४॥
Footnote: ४−(यत्) यदि (एनसः) अ० २।१०।८। अपराधात् (मातृकृतात्) मात्रा निष्पादितात् (शेषे) स्वपिषि। आलस्यं करोषि (पितृकृतात्) जनकेन कृतात्। अन्यद् यथा म० २ ॥
