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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
आत्मा के उन्नति का उपदेश।
Word-Meaning: - (यत्) जो (स्त्रियै) स्त्री के लिये वा (पुंसे) पुरुष के लिये (अचित्त्या) अचेतना से (दुद्रोहिथ) तूने अनिष्ट चीता है वा (शेपिषे) शाप दिया है। (उभे) दोनों.... म० २ ॥३॥
Connotation: - मनुष्य परद्रोह और पर निन्दा से पृथक् रहे और किसी प्रकार से होजाने पर प्रायश्चित्त करे ॥३॥
Footnote: ३−(यत्) यदि (दुद्रोहिथ) द्रुह−लिट्। अनिष्टं चिन्तितवानसि (शेपिषे) शपितवानसि (स्त्रियै) (पुंसे) पुरुषाय (अचित्त्या) अचेतनया। अन्यद् गतम् ॥
